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गुरुवार, 18 मार्च 2021

राम जित बाबा ,मंदिर- ramjit baba tempal, jigni, ballia u.p

राम जित बाबा ,मंदिर  ramjit baba tempal, jigni, ballia u.p

       नमस्कार दोस्तों आज मै  आप लोगो को एक मंदिर के बारे में बताने जा रहा हु जो एक छोटे से गांव में बना है इस मंदिर में स्थापित देवता का बिसेस महत्वा इस लिए है , की अगर कोई इंसान को सर्प ने डंस दिया तो यदि ओ इंसान 24 घंटे के पहले यंहा पहुँच जाता है तो ओ ठीक हो जाता है।  ( ऐसा लोगो का मान्यता है) 

   

           दोस्तों हम बात कर रहे है श्री राम जित बाबा मंदिर की ये मंदिर उत्तर प्रदेश के बलिए जिले के जिगनी गांव में है , श्री राम जित बाबा के यंहा बहुत ही दूर दूर से लोग दरसन बर्न के लिए एते है।  बलिया जिले के किसी भी छेत्र में किसी ब्यक्ति को सर्प ने डंस लिया है तो उसके परिवार वाले जिगनी गांव के श्री राम जित बाबा के पास लाते हैं। और वंहा बैठे एक ब्यक्ति जो बाबा की पूजा करते है ओ अपने मंत्रो और बाबा के ध्यान में रख कर उस ब्यक्ति का दुःख दूर कर देते यही। ऐसा बहुत ही बार हुआ है।  


               दोस्तों श्री राम जित बाबा के यंहा नाग पंचमी के दूसरे दिन सप्तमी को बहुत ही बड़ा मेला लगता है और लोग यंहा पूजन करने के लिए एते है।  यंहा पर बलिया जिले के सभी छेत्रो से लोग पूजा करने के लिए एते है।  हर गांव से बाबा के लिए जुलुस निकली जाती है। बांस की बानी बहुत ही बड़ी बड़ी जुलुस निकली जाती है और डी जे और साउंड के साथ लोग नाचते गेट हुए राम जित बाबा को पूजन करने जाते है और वंहा से मेला घूम कर सैम को घर वापिस एते है।

 

              दोस्तों रामजीत बाबा का मंदिर बहुत ही अच्छा बनाया गया है ये मंदिर जमीन से बहुत उचाई पर बनाया गया है , और इस मंदिर की लम्बाई भी 5 या 6 मंजिल को होगी मंदिरो पर अधिकांश सांपो की आकृतिया बानी हुई है और मंदिर के दीवारों पर रामायण की चौपईया लिखी हुई है मंदिर के मुख्या बिच अस्थान पर श्री रामजीत बाबा का स्थान है और चारो तारभ चौतरा (ओटला ) बनाया गया है। 


        दोस्तों रामजीत बाबा में मंदिर के पास और भी भगवान का मंदिर है।  उनके मंदिर के पास श्री गंगा ब्रह्म बाबा का मंदिर है।  ये मंदिर भी बहुत ही बढियाँ बनाया गया है।  रामजीत बाबा के पूजा के साथ साथ श्री गंगा ब्रह्म बाबा का भी पूजा होता है।  इनका मंदिर भी जमीन से 6 या 7 फिट की ऊंचाई पर बनाई गई है।  मंदिर के आगे एक बहुत बड़ा पेड़ है।  इन मंदिर के कुछ दुरी पे हनुमान जी का मंदिर है ये मंदिर भी बहुत अच्छी बानी हुई है।  यंहा के हनुमान जी का भी बहुत महातम है।  जो लोग रामजीत बाबा को पूजा करने एते है ओ साथ ही साथ गंगा बाबा और हनुमान जी को भी पूजा करते है, मतलब इस जिगनी गांव में एक वंहा एक दिव्या स्थान बनाया गया है इन मंदिरो के पास से एक बड़ी सी नहर गुजारी हुई है।  यंहा जाने पर बहुत ही आनंद और सन्ति का अनुभव होता है।  


          राम जित बाबा को सप्तमी के दिन दूध के साथ धान का लावा चढ़ाया जाता है।  और फूल बतासे या कोई मीठा प्रसाद चढ़ाया जाता है।  ऐसा सुना गया है की राम जित बाबा बल्लिया जिले में ही एक मुडियारी गांव है उस गांव के रहने वाले थे , राम जित बाबा को किसी डायन ने कला जादू कर के सर्प के द्वारा डंसवा दी थी।  जिसके बाद राम जित बाब गांव के लोगो के सपने में आने लगे और अपनी साडी बाटे बता कर , अपनी पूजा के लिए कहते।  लोगो ने बाबा की  उसी मुडियारी गांव में स्थान बनाकर पूजा करने लगे फिर लोगो ने सोचा की बाबा का सबसे अच्छा स्थान जिगनी गांव में मेन रोड पर रहेगा।  लोगो ने पंडित से पूजा करवाकर इस स्थान पर बाबा को स्थापित कर दिया।  तब से लोग इनकी महिमा जो जानने लगे और यंहा आने लगे हर साल जुलुस के साथ लोग यंहा एते है और बाबा को प्रसाद चढ़ाते है। 

मंगलवार, 16 मार्च 2021

OMKALESWAR ओम्कारेश्वर मंदिर कंहा है

   नमस्कार दोस्तों कैसे है आप लोग उम्मीद करता हूँ की आप सब लोग अच्छे  होंगे आप लोग ओम्कारेश्वर का नाम तो सुना ही होगा और कई लोग तो वंहा घूमने भी गए होंगे या फिर जाना चाहते होंगे दोस्तों ओम्कारेश्वर हिन्दू धर्म का बहुत ही महातम स्थान है।  आप लोग जानते होंगे की भगवान सिव के 12 ज्योतिर्लिंग है।  उसी ज्योतिर्लिंग में से ॐ कारेश्वर एक है जो की खंडवा जिले में स्थित है यंहा पर बहुत से लोग घूमने के लिए हर साल  आतें  है. तो चलिए दोस्तों  आज मैं  इस पोस्ट में आप लोगों को  ओमकालेस्वर महाराज से जुडी बहुत सी जानकारियों के बारे में बताऊंगा । 



ओम्कारेश्वर के साथ साथ नर्मदा नदी का भी बहुत महातम है। मन जाता है की  नर्मदा नदी राजा  मैखल की पुत्री है।  वेद ग्रंथो में मने तो कहा जाता है की अगर आप गंगा नदी में स्नान करके जो फल प्राप्त करते है ओ सिर्फ नर्मदा नदी के दरसन मात्रा से ही प्राप्त हो जाते हैं। जैसे उज्जैन से ओमकालेस्वर की दुरी कितनी है ,ओम्कारेश्वर में कौन सी नदी है ,इंदौर से ओम्कारेश्वर की दुरी कितनी है, ओम्कारेश्वर कौन सी पहाड़ी पर है।वैसे ये सब बाते जानने के बाद आपके मन में होगा की एक बार तो ओम्कारेश्वर तो जाना चाहिए , दोस्तों यंहा की जगह इतनी बहुत ही खूबसूरत है।  दोस्तों यंग थोड़ी गर्मी लगाती है क्यूंकि ये अपने अस पास के छेत्रों से थोड़ा सा निचे है।  चारो तरफ पहाड़िया है नर्मदा नदी नर्मदा कुंड अमरकंटक (AMARKANTAK ) से निकलती है और खंभाल की खड़ी अरब सागर (ARAB SAGAR) में गिरती है।  नर्मदा नदी की लम्बाई भी काम नहीं है इसकी लम्बाई 1312 किलो मीटर है। नर्मदा नदी मध्यप्रदेश (MADHYAPRADESH) , महाराष्ट्र ( MAHARASTRA) , गुजरात (GUJARAT) से होकर गुजरती है। इस नदी का प्राचीन नाम रेवा (REWA) थी। 



     ओम्कारेश्वर खंडवा जिले में स्थित है।  ओमकार जो ध्वनि ॐ है, ओ सृस्टि के रचिता ब्रम्हा के मुख से सर्वप्रथम निकली थी। वही ओमकार स्वरुप ये ज्योतिर्लिंग ओम्कारेश्वर है।  दोस्तों ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी और मान्धाता नदी  के बिच में है इस ज्योतिर्लिंग के  दरसन करने के लिए दूर - दूर से लोग एते है।  इस ज्योतिर्लिंग का अपना बहुत ही बड़ा महातम है।  ये 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है।  


   
     दोस्तों ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश का प्रमुख सहर इंदौर से 79 किलोमीटर और उज्जैन से 139 किलो मीटर की दुरी पर है । इंदौर से ओम्कारेश्वर जाने वाले रस्ते पहाड़ियों से होकर गुजरती है। ओम्कारेश्वर में घूमने और देखने के बहुत ही बढियाँ स्थान है। ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग मोटरका गांव से 14  किलो मीटर की दुरी पर है, यह  द्वीप हिंदी धर्म के प्रतिक ॐ के आकर का है। ओम्कारेश्वर में ओम्कारेश्वर के साथ - साथ ममलेश्वर मंदिर भी है। इन दोनों सिव लिंगो को एक ही ज्योतिर्लिंग मन जाता है। यंहा पर जैन धर्म के कई मंदिर भी है।  अगर आप सरे तीर्थ कर लिए लेकिन अपने ओम्कारेश्वर तीर्थ नहीं किये तो सरे तीर्थ बेकार हैं ऐसा मन जाता है। 
      


   यंहा दिवाली के समय धनतेरस को यंहा भब्या पूजन होती है और रात्रि को जागरण होती है।  यह पूजा देखने के लिए दूर दूर से लोग एते है। इस दिन सुबह 4 बजे अभिषेक पूजन उसके बाद कुबेर भगवान और लक्छमी माता की महा यज्ञ हवन के साथ पूजन होती ही 

 यंहा एक ज्योतिर्लिंग ममलेश्वर भी है।  ममलेश्वर भगवान की मंदिर अहिल्या बाई ने बनवाया था। 
  
 
 तो दोस्तों इसी के साथ अपना पोस्ट समाप्त करता हूँ।  आप इस पोस्ट को पढ़े इसके लिए धन्याबाद।  दोस्तों ये पोस्ट आप लोगो को कैसा लगा कमेंट में लिख कर बताये अगर इस पोस्ट में कोई गलती है तो बताये ताकि में इस पोस्ट में सुधारू धन्यवाद दोस्तों। 

सोमवार, 8 मार्च 2021

सर्वोत्तम परिणामों के साथ व्यायाम करें

ऐसा प्रतीत होता है कि दिन में एक निश्चित समय पर प्रशिक्षण निर्धारित करने की समस्या अधिक गंभीर है। जब हम प्रशिक्षण लेते हैं तो उस अवधि का चुनाव अधिक कारकों पर निर्भर करता है।


यह शुरू से ही स्पष्ट है कि हम हर मुख्य भोजन के बाद तीन घंटे की अवधि पर विचार नहीं कर सकते, क्योंकि यह अंतराल केवल पाचन के लिए आवंटित किया जाना चाहिए। इस अवधि में उल्लेखनीय शारीरिक प्रयास पूरी तरह से अस्वीकार्य है (रक्त को मांसपेशियों को निर्देशित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि गैस्ट्रिक पाचन की प्राथमिकता है)।


अधिक सटीक रूप से, लोगों को तब प्रशिक्षण देना चाहिए जब उनका पेट खाली हो, लेकिन ग्लाइसेमिया का स्तर स्थिर होना चाहिए। एक सामान्य जागरण - सो लय पर विचार करते हुए, दो अनुकूल क्षण होते हैं जब हम सामान्य रूप से फिटनेस कार्यक्रम और प्रशिक्षण निर्धारित कर सकते हैं: एक सुबह 10-12 के बीच, और दूसरा दोपहर में 16-19 के बीच।


अधिकांश खेलों में वर्तमान अभ्यास इन अवधियों को प्रशिक्षण के लिए सर्वोत्तम मानता है।


प्रशिक्षण के लिए इनमें से एक अंतराल चुनने का एक और तर्क है शरीर का तापमान, जो अब इसकी अधिकतम सीमा तक पहुंच जाता है। दूसरी अवधि (16-19) इस दृष्टिकोण से पहले वाले से भी बेहतर है, क्योंकि तापमान अधिक है और यह खेल प्रदर्शन को बढ़ाता है।


सुबह जल्दी उठना, नाश्ते के बाद और नाश्ते से ठीक पहले ट्रेन करना उचित नहीं है। हालांकि, ऐसे लेखक हैं जो इस अवधि में प्रशिक्षण होने के विचार का समर्थन करते हैं। सोने के दौरान भोजन की कमी के बाद ग्लाइकोजन का भंडार सीमित है और यह अन्य मामलों की तुलना में प्रशिक्षण में पहले वसा ऊतक का उपयोग करने का एक कारण है।


दुर्भाग्य से, एक ही समय में, तनाव हार्मोन (कोर्टिसोन) को प्रचुर मात्रा में स्रावित किया जाता है, इसलिए वसा ऊतक के अलावा, बहुमूल्य मांसपेशियों के ऊतकों को खोने का जोखिम होता है।


इसके खिलाफ एक और तर्क यह है कि सुबह के घंटों में शरीर का तापमान बहुत कम होता है, इसलिए कोई गति पैरामीटर (बल, प्रतिरोध, गति, गतिशीलता, कौशल) को पूरी तरह से सक्रिय नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार, एक लंबे और थकाऊ वार्मिंग आवश्यक होगा, वास्तविक प्रशिक्षण में बाधा।




हर कोई इस बात से सहमत है कि सोने से पहले प्रशिक्षण बिल्कुल भी उचित नहीं है, क्योंकि वे कुछ घंटों की नींद लेते हैं, कोर्टिकल गतिविधि और शरीर के तापमान को देखते हुए।


इस अनुसूची को किसी भी बायोरिएड ​​और टाइम ज़ोन के लिए अनुकूलित किया जा सकता है और एक बार स्वचालितता स्थापित होने के बाद, प्रशिक्षण की प्रभावशीलता निश्चित रूप से बढ़ जाएगी।

सात टिप्स एक लंबे और स्वस्थ जीवन के लिए

           आधुनिक चिकित्सा तकनीक जितनी अच्छी है, यह आपकी जीवन शैली के कारण होने वाली शारीरिक परेशानियों से कभी नहीं बचा सकती है। हर समस्या के लिए एक आधुनिक चिकित्सा तय करने के बजाय,आप अपने जीवन सैली सुधरे तो आप शायद ही कभी बीमार पड़ेंगे।

             दोस्तों हमें अपने काम काज के साथ साथ अपने सरीर को भी ध्यान रकहना चाहिए।  तो चलिए आज इस पोस्ट के अनुसार आपको ये बातों का पता चलेगा की हमें अपने सरीर को स्वस्थ रखने के लिए किस तरह से हवन जीना चाहिए।  और हमें स्वस्थ रहना चाहिए।   


1. पर्याप्त व्यायाम करें


               पहले के ज़माने में लोगों को अपने सामान्य कार्यों के दौरान अपने भौतिक शरीर का उपयोग करना पड़ता था। लेकिन आज सभी लोग आराम का काम करना पसंद करते है बहुत से लोग सुबह देर से उठे ब्रश मंजन किये और नास्ता करके और कार में बैठ कर ऑफिस के लिए निकल जाते है और फिर घर वापिस आकर आराम से बैठ जाते है। ऐसे लोगो को शारीरिक श्रम नहीं करना पड़ता।  इस लिए हमारे सरीर में नाना प्रकार के रोग हो जाते है।  आज के समय में हमारे सरीर को पोस्टिक आहार और श्रम की आवस्यकता है जो की अज्ज नहीं मिल रही है।  अगर अप्प अपने सरीर को अच्छे आहार देंगे और अच्छी एक्सरसाइज करने लगे तो आपके सरीर का 75 प्रतिसत रोग ख़त्म हो जायेगा। 


2. जब आप नींद महसूस करें तो सो जाएं - 


                 यह सरल लग सकता है, लेकिन कहने का मतलब की जब हमें हमारे सरीर को  नींद की आवस्यकता होती है तो हमारा सरीर अपनेआप हमें सिग्नल देना चालू कर देता है मतलब हमें नींद आने लगाती है लेकिन हम कभी अपने  इम्पोर्टेन्ट काम (Important work) या फिर मोबाइल पर देर तक लगे रहने से हमें सोने का मन नहीं करता है।और नींद भी नहीं अति है। इसके कारन हमारे सरीर कई बीमारियों से ग्रसित हो जाता है। हमारे सरीर का नेचर ही ऐसा है ,की जब सरीर को एनर्जी चाहिए तो भूख लग जाती है , पानी की कमी होने पर प्यास लग जाती है वैसे ही जब हमारा सरीर थक जाती है तो हमें नींद की जरुरत पद जाती है। अगर हम अपने सरीर को पर्याप्त नींद दें तो हमारे सरीर से मानसिक तनाव से लेकर बहुत साडी बीमारिया ख़त्म हो जाती है। 

3. जब आपको भूख लगे तब खाएं-


              यह भी एक सरल विचार है,  लेकिन कभी कभी ऐसा होता है की हमें भूख नहीं रहती है पेट पहले से ही भरा होता है फिर भी कोई स्वादिस्ट चीज देख कर हमें भूख लग जाती है और हम खा लेते है।  पर ये गलत आदते है , हमारे सरीर से एनर्जी जब ख़त्म हो जाती है या फिर हमारा पेट खली हो जाता है तब हमें भूख लगाती है।  यदि हम भूख लगाने पर खाना कहते है तो ओ खाना अच्छे चाव से खाया जाता है और खाना अच्छे से पचता भी है।  इसके बाद न हमें अपच की प्रॉब्लम होता है न ही गैस की। 

4 . अपने सरीर को आराम भी दें 

              हमारा सरीर काम करते - करते जब थक जाता है तो हमें अपने सरीर को आराम देना चाहिए,  क्यूंकि जब हम काम करते है तो हमारे सरीर की मांसपेशिया में थकान अता है जिससे लगातार काम करते रहने पर मांसपेसियों में दर्द होने लगता है जिससे सरीर का बिकास भी नहीं होता इस लिए हमें पर्याप्त काम के साथ साथ पर्याप्त आराम की भी आवस्यकता होती है। 




5. बिस्तर पर जाने से पहले ठंडे पानी से हाँथ पेअर धो 


जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, स्वास्थ्य के रखरखाव के लिए उचित नींद आवश्यक है। यदि आप अपने महत्वपूर्ण मोटर और संवेदी अंगों (हाथ, हाथ, आंख, पैर, मुंह, जननांग) को ठंडे पानी का उपयोग करके सोने से पहले धोते हैं या फिर स्नान कर लेते हैं तो यह आपको आराम देगा और आपको गहरी नींद के लिए तैयार करेगा।


6. नियमित रूप से ध्यान करें


आपका शरीर आपके दिमाग से जुड़ा हुआ है। तनाव और चिंता हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर अपना असर डालते हैं।आज कल के भाग दौड़ भरी जिंदगी में सरीर के साथ साथ दिमाग को भी आराम देना चाहिए अगर आप अपने दिमाग को आराम नहीं देंगे तो आपको चिढ चिढ़ापन और तनाव होगा इसलिए  ध्यान एक मानसिक व्यायाम है जो अन्य बातों के अलावा, आपको जीवन की चिंताओं से खुद को अलग करने की अनुमति देता है। एक सरल तकनीक सीखें और इसे नियमित रूप से करें।


7. हर दिन जल्दी उठें-

  जी हाँ सुबह जल्दी उठाने से बहुत सरे फायदे होते है। क्यूंकि सुबह का वातवरन स्वक्छ और साफ होता है इस वातावरण में घूमने से हमारे मन और सरीर को बहुत अच्छी ताकत और एनर्जी मिलती है। देखिये दोस्तों हमारा सरीर , हवा , पानी, भोजन और अच्छे बिचारों से हितो बना है ये चीजे अगर स्वक्छ और साफ आपको मिलते रहेंगे तो आपका सरीर अच्छा होगा इस लिए स्वच्छ हवा में घूमने की  डेल और ये मिलेंगी आपको सुबह जल्दी 

  तो दोस्तों असा करता हूँ की ये टिप्स आपको समझ आ गया होगा।  अगर इस लेख में आपको कुछ गलतिया दिख रही है तो आप कमेंट करके हमें बताये 


सोमवार, 1 मार्च 2021

यात्रा ट्रिप्स के लिए 7 टिप्स

 हम यात्राएं करना पसंद करते हैं, चाहे वह एक छोटी सड़क यात्रा हो, या कुछ दूर के विदेशी स्थानों की हवाई यात्रा हो। लेकिन हम सभी अक्सर अपनी यात्रा के लिए योजना बनाने में विफल होते हैं और परिणाम हताशा और झुंझलाहट होता है। वैसे हमें गर्मी की छुटियो में या कभी भी जरूर घूमने जाना चाहिए क्योंकि घूमने से हमारा एक तो ज्ञान बढ़ता है और हमारा दिमाग रोज मारा के जीवन सैली से ,हमारा दिमाग फ्रेश होता है।  




  तो दोस्तों हम कंही घूमने जाते है तो उस यात्रा में हमें कई चीजों क ध्यान रखना चाहिए ताकि हमारी यात्रा अच्छी हो।  क्यों की हमारे चाडक्या निति में भी आचार्य चाडक्या ने कहा है।  प्रदेश में हमारा दिमाग और अपनी समझ  ही अपना मित्र होता है  . तो चलिए मई इस पोस्ट में आप सभी को सफर से रिलेटेड कुछ नियम बताऊंगा जिससे आपको सफर में कोई परेशानियों का सामना न करना पड़े। 







1. यदि आप अपने बाइक या अपनी साधन से यात्रा कर रहे है तो  सड़क यात्राओं के लिए, सही नक्शे प्राप्त करें और अपने मार्ग की अच्छी तरह से योजना बनाएं।


2. कभी भी, किसी हवाई अड्डे पर सुरक्षा के पास बम या आतंकवादियों के बारे में मजाक न करें। कई लोगों ने मजाक में उल्लेख किया है कि उनके पास उनके मामले में एक छोटा बम है क्योंकि उनके सामान का निरीक्षण किया जा रहा है। बाद में पुलिस स्टेशन में जाने के बाद  उन्हें अपनी मूर्खता पर गहरा अफसोस हुआ है ।


3. आप अपने कीमती सामान का बहुत ज्यादा ख्याल रखें ताकि सफर में आने प्रकार के इंसान मिलते है कुछ अच्छे तो कुछ बुरे 


4. यदि आप कहीं दूर सफर में जा रहे है तो अप्प अपने साथ जरुरी सामान जरूर रखे , जैसे खाने का सामान , पिने की बोतल , कुछ कपडे जिससे की अप्प अपने हाँथ मुँह धोने के बाद आप उससे पोछ सके। 

5. यदि अप्प किसी बिदेश की यात्रा करने जा रहे है तो अप्प वंहा की मानसून के बारे में जानकी बहले से कर ले क्यूंकि मानसून अच्छी होगी तभी तो आपको घूमने में मजा आएगा। 


6. यदि अप्प बच्चों के साथ घूमने जाते है तो बच्चों का ध्यान अवस्य रखे।  उनका काने पिने की बेवस्था और कपडे की , सोने की। 

7.यदि अप्प अनहि दूर  जा रहे है तो अपने साथ दवा भी ले जाएँ , जैसे की दर्द की दवा चोट लगाने की मलहम बुखार की दवा ये साडी चीजे आपको बहुत ही लाभ देंगी।  दवा ले जाने का मेरा  मतलब  ये नहीं की आपकी तबियत ख़राब हो जाये , आप कंही घूमने जाते है तो वंहा की पानी पिटे है बहार की भोजन करते है , तो जरू थोड़ा ताबिया बिगड़ ही जाता है।  

धन्य बाद  इस पोस्ट को पढ़ने के लिए।  आपकी यात्रा मंगलमय हो। 


गोवा की छुट्टियां

 गोवा -




भारतीय राज्यों का सबसे छोटा राज्य , भारत के पश्चिमी तट पर स्थित है। यह भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां एक लाख से भी अधिक पर्यटक घूमने के लिए , ज्यादातर विदेश से, सालाना गोवा आते हैं।यह राज्य 3000 वर्ग किलोमीटर से अधिक के क्षेत्र में फैला है।यंहा समुन्द्र तट 100 किमी से अधिक की तटरेखा में फैला है। इस राज्य का पश्चिमी किनारा, अरब सागर के समुद्र तट और इसके पूर्वी हिस्से में एक पर्वत श्रृंखला है।







पर्यटक यंहा हरे-भरे पहाड़ों, समुद्र तटों, शांत फ़िरोज़ा नीले पानी और धूप का मजा लेते है। गोवा में नारियल के पेड़ों बहुत ज्यादा मात्रा में है जो बहुत ही आकर्षित होते हैं। यंहा पर कई धर्मों, विविध भाषाओं, और अपनी जीवंत आत्मा और मैत्रीपूर्ण लोगों के कपड़े के साथ यंहा का रहस्य दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करता है।


जलवायु - यंहा की जलवायु जून से अगस्त की अवधि को छोड़कर जब गोवा में भारी बारिश होती है तब गोवा में बहुत ही सुन्दर दृस्य हो जाता है जो लोगो को बहुत ही अच्छा लगता है। इस लिए इस समय लोग बहुत ज्यादा की तादात में आते हैं और वर्ष के बाकि महीनो के लिए गोवा में 28 डिग्री के बीच तापमान के साथ गर्म और आर्द्र रहता है।