ओम्कारेश्वर के साथ साथ नर्मदा नदी का भी बहुत महातम है। मन जाता है की नर्मदा नदी राजा मैखल की पुत्री है। वेद ग्रंथो में मने तो कहा जाता है की अगर आप गंगा नदी में स्नान करके जो फल प्राप्त करते है ओ सिर्फ नर्मदा नदी के दरसन मात्रा से ही प्राप्त हो जाते हैं। जैसे उज्जैन से ओमकालेस्वर की दुरी कितनी है ,ओम्कारेश्वर में कौन सी नदी है ,इंदौर से ओम्कारेश्वर की दुरी कितनी है, ओम्कारेश्वर कौन सी पहाड़ी पर है।वैसे ये सब बाते जानने के बाद आपके मन में होगा की एक बार तो ओम्कारेश्वर तो जाना चाहिए , दोस्तों यंहा की जगह इतनी बहुत ही खूबसूरत है। दोस्तों यंग थोड़ी गर्मी लगाती है क्यूंकि ये अपने अस पास के छेत्रों से थोड़ा सा निचे है। चारो तरफ पहाड़िया है नर्मदा नदी नर्मदा कुंड अमरकंटक (AMARKANTAK ) से निकलती है और खंभाल की खड़ी अरब सागर (ARAB SAGAR) में गिरती है। नर्मदा नदी की लम्बाई भी काम नहीं है इसकी लम्बाई 1312 किलो मीटर है। नर्मदा नदी मध्यप्रदेश (MADHYAPRADESH) , महाराष्ट्र ( MAHARASTRA) , गुजरात (GUJARAT) से होकर गुजरती है। इस नदी का प्राचीन नाम रेवा (REWA) थी।
ओम्कारेश्वर खंडवा जिले में स्थित है। ओमकार जो ध्वनि ॐ है, ओ सृस्टि के रचिता ब्रम्हा के मुख से सर्वप्रथम निकली थी। वही ओमकार स्वरुप ये ज्योतिर्लिंग ओम्कारेश्वर है। दोस्तों ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी और मान्धाता नदी के बिच में है इस ज्योतिर्लिंग के दरसन करने के लिए दूर - दूर से लोग एते है। इस ज्योतिर्लिंग का अपना बहुत ही बड़ा महातम है। ये 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है।
दोस्तों ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश का प्रमुख सहर इंदौर से 79 किलोमीटर और उज्जैन से 139 किलो मीटर की दुरी पर है । इंदौर से ओम्कारेश्वर जाने वाले रस्ते पहाड़ियों से होकर गुजरती है। ओम्कारेश्वर में घूमने और देखने के बहुत ही बढियाँ स्थान है। ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग मोटरका गांव से 14 किलो मीटर की दुरी पर है, यह द्वीप हिंदी धर्म के प्रतिक ॐ के आकर का है। ओम्कारेश्वर में ओम्कारेश्वर के साथ - साथ ममलेश्वर मंदिर भी है। इन दोनों सिव लिंगो को एक ही ज्योतिर्लिंग मन जाता है। यंहा पर जैन धर्म के कई मंदिर भी है। अगर आप सरे तीर्थ कर लिए लेकिन अपने ओम्कारेश्वर तीर्थ नहीं किये तो सरे तीर्थ बेकार हैं ऐसा मन जाता है।
यंहा दिवाली के समय धनतेरस को यंहा भब्या पूजन होती है और रात्रि को जागरण होती है। यह पूजा देखने के लिए दूर दूर से लोग एते है। इस दिन सुबह 4 बजे अभिषेक पूजन उसके बाद कुबेर भगवान और लक्छमी माता की महा यज्ञ हवन के साथ पूजन होती ही
यंहा एक ज्योतिर्लिंग ममलेश्वर भी है। ममलेश्वर भगवान की मंदिर अहिल्या बाई ने बनवाया था।
तो दोस्तों इसी के साथ अपना पोस्ट समाप्त करता हूँ। आप इस पोस्ट को पढ़े इसके लिए धन्याबाद। दोस्तों ये पोस्ट आप लोगो को कैसा लगा कमेंट में लिख कर बताये अगर इस पोस्ट में कोई गलती है तो बताये ताकि में इस पोस्ट में सुधारू धन्यवाद दोस्तों।
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