INDIA TRIP
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बुधवार, 30 जून 2021
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सोमवार, 28 जून 2021
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शुक्रवार, 18 जून 2021
इंदौर से 100 किलोमीटर की दुरी पर घूमने का स्थान,INDORE TRAVEL
इंदौर से 100 किलोमीटर की दुरी पर घूमने का स्थान
दोस्तों इंदौर मध्य प्रदेश का एक सहर है जो की उज्जैन से 60 किलो मीटर की दुरी पर और देवास से 43 किलो मीटर की दुरी पर स्थित है। दोस्तों इंदौर एक ऐसा सहर है जंहा मध्य प्रदेश में अन्य सहर से ज्यादा आबादी रहती है। इंदौर में इंडस्ट्रियल एरिया भी मौजूद है जिसके लिए दूर दूर से लोग इंदौर में एते है।
इंदौर में सिछा के लिए बहुत सरे स्कूल और कॉलेज मौजूद है जिसके कारन यंहा दूर दूर से छात्र सिक्छा ग्रहण करने एते है। दोस्तों मई आप लोगों को बता दू की यदि आप इंदौर सहर में अये है और इंदौर के खूबसूरत और फेमस जगहों पर घूमना चाहते है तो मई आप लोगों को इंदौर की ओ जगहों के बारे में बताऊंगा को की बहुत ही ज्यादा फेमस है।
दोस्तों वैसे तो इंदौर में घूमने के लिए बहुत ही अच्छे- अच्छे स्थान है लेकिन मै आपलोगों को बताऊंगा की इंदौर से 100 किलोमीटर के अंदर में घूमने जाने या पिकनिक मानाने जाने के लिए ये सरे जगह बहुत ही बढ़िया रहेंगे ये जगह इंदौर के साथ साथ बहुत ही दूर तक फेमस है।
Ralamandal Abhyaranya रालामंडल अभ्यारण्य -
दोस्तों रालामंडल अभ्यारण्य एक ऐसा जगह है जंहा बहुत ही ज्यादा हरियाली है , यदि आप प्राकृतिक और जंगलों में घूमना पसंद करते है तो ये जगह आपके लिए बेहद पसंद आएगी क्यंकि दोस्तों रालामंडल अभ्यारण्य एक बेहद बड़ा जंगल जैसा है। ये जगह इंदौर से 12 किलो मीटर की दुरी पर है।
Lotus Valley लोटस भैली -
दोस्तों ये लोटस भैली इंदौर से केवल 21 किलो मीटर की दुरी पर है , दोस्तों ये लोटस पार्क एक ऐसा पार्क है जिसकी खूबसूरती जम्बू कश्मीर के जैसा है। दोस्तों इस पार्क को एशिया (asia) की सबसे बड़ी लोटस वैली मन जाता है यंहा की खूबसूरती वास्तव में देखने लायक है वैसे तो इस जगह को बहुत काम लोग जानते है पर ये पार्क गुलावट (gulawat) गांव में है। यंहा बहुत बड़ा तालाब है जो की केवल गुलाबो से ढाका रहता है और यंहा पर बगुचे जैसा है अधिकतर यंहा बांस की झड़े मिलती है।
Tincha Fall तिंछा फॉल -
दोस्तों तिंछा फॉल भी पिलकनिक मानाने के लिए या छुटियों में घूमने जाने के लिए बहुत ही बढ़िया स्थान है यंहा पर बहुत बड़ा वाटर फॉल यानि झरने है। ये इंदौर से महज 24 किलो मीटर की दुरी पर स्तित है।
Ahilya Bai Fort अहिल्या बाई फोर्ट -
दोस्तों यदि आप कोई किला या राजा महाराजाओ के रिलेटेड आप देखना पसंद करते है तो , आपके लिए अहिल्या बाई का किला देखना बहुत ही बढ़िया और सुन्दर होगा। ये किला महेस्वर में है , ये इंदौर से लगभग 97 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है।
दोस्तों अहिल्या बाई का किला देखने लायक बहुत ही बढ़िया स्थान है जो की नर्मदा नदी के किनारे बना हुआ है। यंहा पर अहिल्या माता की प्रतिमा है जो उनके हाँथ में शिवलिंग लिए हुए बनाया गया है , अहिल्या माता का प्रतिमा की छाया नर्मदा नदी में दिखाई देती है। ये एक खूबसूरत पर्यटक स्थल है। यंहा जाने के बाद आप नर्मदा नदी में स्नान भी कर सकते है।
Janapav hill जाना पाव की पहाड़ी -
दोस्तों क्या आप जानते है की भगवान परसुराम का जन्म स्थान कान्हा पर है ? नहीं तो दोस्तों जानापाव की पहाड़ी ही ओ जगह है जंहा भगवान परसुराम जा जन्म हुआ था ( खैर कई लोगों को पता होगा ) दोस्तों जानापाव की पहाड़ी भी घूमने जाने के लिए बहुत ही स्थान है। ये इंदौर से करीबन 28 किलो मीटर की दुरी और इंदौर में महू तहसील के हासलपुर गांव में स्थित है।
सोमवार, 14 जून 2021
प्रयागराज सहर और यंहा का कुम्भ मेला
प्रयागराज सहर | PRAGRAJ CITY -
इलाहबाद दोस्तों आज इस पोस्ट में जिस सहर के बारे में बात करेंगे उसका नाम है प्प्रयागराज जो पहले इलाहबाद नाम से जाना जाता था। लेकिन दोस्तों आपको जान कर हैरानी होगी की इस प्रयागराज का नाम इलाहबाद के भी पहले प्रयागराज ही था। 1500 इसबी से मुस्लिम सासको द्वारा इसका नाम प्रयागराज से बदल कर इलाहबाद रखा दिया गया था।अकबर ने यंहा 1574 ईस्वी में किले का नीव राखी थी। इसके बाद सन 2018 से तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा इसका नाम इलाहबाद से बदल कर फिर प्रयागराज रख दिया गया।
इलाहबाद यानि प्रयाग राज की विश्वविद्यालय का प्रथम कुलपति प्रोफ़ेसर राजेंद्र प्रसाद जी थे।
प्रयाग राज एक प्राचीन सहर है यंहा सुरु से तीर्थ करने के लिए लोग दूर दूर से एते है दोस्तों यंहा पर 12 वर्ष बाद महँ कुम्भ का ममेला लगता है जोसमे काफि दूर दूर से लोग एते है यंहा हिमालयो में बेस साधु संत भी इस कुम्भ के मेले में स्नान करने एते है।
प्रयागराज सहर और यंहा का कुम्भ मेला सदियों से चलते आ रहा है। ऐसा हिन्दू मान्यताओं के आधार पर माना जाता है की भगवान ब्रह्मा जीने सृस्टि की रचना करने के बाद यही प्रयाग में उन्होंने यज्ञ किया था जो ये प्रथम यज्ञ था इसके वजह से प्र. यानि प्रथम और यज्ञ इस लिए इसका नाम प्रयाग रखा गया
दोस्तों यंहा पर ऐतिहासिक स्थान भी है जो दरसन करने लायक है जिनका नाम मई निचे बताता हूँ - जैसे इलाहबाद (प्रयागराज ) किला ,स्वराज्य भवन ,आनंद भवन, रानी महल अदि है।
इलाहबाद किला प्रयागराज में संगम के निकट बनाया गया है। ये किला मुग़ल सम्राट अकबर के द्वारा 1583 ईस्वी में बनवाया गया था। किले का कुछ भाग पर्यटकों के लिए खोला गया है। इस किले में तीन मीनार हैं यंहा पर लोगों को किले का अशोक स्तम्भ , जोधा बाई महल और सरस्वती कूप केवल देखने की इजाजत है।
दरसनिक स्थल - संगम , हनुमान मंदिर, शंकर बिमान मंडपम,हनुमत निकेतन ( सिविल लाइन में ), सरस्वती कूप,(किले के भीतर स्थित), समुन्द्र कूप ( गंगा पर स्तित ), मनकामेश्वर मंदिर , शिव कुटी ( गंगा नदी के किनारे ) अदि है
दोस्तों प्रयाग में गंगा के किनारे बहुत से घाट है जहाँ पर लोगो का स्नान और पूजा पथ होता है , जैसे - रसूलाल घाट , फाफामऊ घाट यमुना किनारे - सरस्वती खत , काली घाट, बलुआ घाट ,औरल घाट, गायघाट और बरगद घाट अदि है।
इलाहबाद के कुछ खूबसूरत जगह - दोस्तों इलाहबाद में भी घूमने का बहुत ही बढ़िया स्थान है यदि आप इलाहबाद जाते है तो आप इन जगहों पर अवस्य घूमे जैसे - मिंटो पार्क , नई यमुना ब्रिज ,आल सेंटस कैथेड्रल ,आनंद भवन ,

