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बुधवार, 30 जून 2021

1991 से मनाया जाता है डॉक्टर डे doctors day


डॉक्टर डे कब मनाया जाता है 

दोस्तों आज 1 जुलाई है अपने आज सुना होगा की आज डॉक्टर्स डे है।  क्या आप जानते है की ये डॉक्टर्स डे कब से मनाया जाता है और किसके नाम पर डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। दोस्तों आज के ये कोरोना और अन्य बिमारिओं को ख़त्म करके मरीज को ठीक करने में हमारे डॉक्टरों का मुख्य योगदान है। डॉक्टर इंसान के रूप में बागवान मने जाते है क्यंकि जब हमें कोई तकलीफ या बुखार होता है तो हमें दुनिया की कोई भी चीझ अछि नहीं लगाती फिर हमें ये डाक्टर जोकि पहले के ज़माने में बैद के पास हम जाते है और दवा लेकर हम अपने आप को अच्छा महसूस करते है।  तो चलिए दोस्तों आगे हम पढ़ते है की डॉक्टर्स डे क्यों मनाया जाता है। 



  दोस्तों भारत के केंद्र सर्कार  सन 1991 में पहली बार  डॉक्टर्स डे मनाई थी तब से हमरे देस में डॉक्टर डे मनाया जाता है।  दोस्तों डॉक्टर्स डे बिहार में जन्मे एक महान डॉक्टर्स के पुण्यतिथि पर मनाया जाता है। ये दिन सभी डॉक्टरों को अपनी कृतज्ञता ब्यक्ति करने का दिन है। 



  दोस्तों बता दें की डॉक्टर्स डे डॉ. बिधानचंद्र रॉय   की पुण्य तिथि पर मनाया जाता है। ये एक महान डॉक्टर थे इनका जन्म 1 जुलाई 1882 को बिहार के पटना (patna) जिले के खंजाची में हुआ था।  इनकी प्रारंभिक चकचा भारत के स्कूलों में और उच्च सिछा इंग्लैण्ड में हुई थी। वे एक मेघवी छात्र थे जिसके वजह से उनकी सिक्छा अन्य छात्रों के मुकाबले जल्द ही पूरी हो गई। 



    वे एक अच्छे डॉक्टर होने के साथ साथ एक समाज सेवी भी थे। आंदोलन के समय घायल क्रांतिकारिओं का निःस्वार्थ इलाज किये थे और जो कमाते थे ओ पैसे समाज सेवा में लगा देते थे।  वे आंदोलन में भी खड़े हुए थे। उस समय महात्मा गाँधी और नेहरू जी के डाक्टर हुआ करते है महात्मा गाँधी जी के कहने पर इन्होने आंदोलन के भी अपना योगदान दिए थे।  डॉक्टर बिधानचंद्र रॉय जी अपनी पहली डॉक्टर की करियर की सुरुवात सियालदह से किये थे और वे डॉक्टर सी सरकारी नौकरी भी किये थे। 

सोमवार, 28 जून 2021

UTTERAKHAND TRAVEL GUIDELINE IN COVID -19




दोस्तों घूमने  में आनंद किसको नहीं आता है। और वैसे भी बारिस के मौसम में पहाड़ियों की घूमने की बात हो तो उसका आनंद कुछ और ही होता है।  तो दोस्तों यदि आप जंगल और पहाड़िया देखना पसंद करते हैं तो दोस्तों आप उत्तराखंड की पहाड़ियों की खूबसूरती के बारे में तो जानते ही होंगे सायद उसी खूबसूरती को देखने के लिए अपने ये सर्च किया। दोस्तों वैसे तो उत्तराखंड में हर मौसम मे पहाड़ों और जंगलो की खूबसूरती दिखती है लेकिन इस बारिस के मौसम में तो मनो इंसान स्वर्ग में आ गया हो।  

   दोस्तों यदि आप उत्तराखंड की पहाड़ियों में घूमने का आनंद उठाना चाहते है तो आपको कुछ बिसेस बातों का ध्यान में रखना होगा क्यंकि ये कोरोना का समय चल रहा है आपको उत्तराखंड में किन - किन बातो का दयँ रखना पड़ेगा ये हम इस पोस्ट के माध्यम से बताएँगे। और साथी ही साथ दोस्तों ये भी बताएँगे की उत्तराखंड में घूमने जाने से पहले हामी क्या -क्या सावधानिया रखनी चाहिए।  तभी जाकर हम उत्तराखंड की सुंदरता का आनंद ले सकते है 

   दोस्तों उत्तराखंड और हिमांचल प्रदेश लोगों के लिए पहली पसंद होती है।  लेकिन इस कोरोना वाइरल की दूसरी लहार के चलते उत्तराखंड की सरकार ने बार्डर को पर्यटकों के लिए बंद कर दिए थे और लोखड़ौन लगा दिया गया था। जिसके वजह से इस राज्य को बहुत बड़ी नुकसान झेलनी पड़ी क्यूंकि पर्यटकों के वजह से इस राज्य में बहुत अधिक राजस्वा मिलता है। 



  
   लेकिन दोस्तों अब इस राज्य से लाकड़ौन हटा दिया गया है और पर्यटकों को उत्तराखंड की सुंदरता को देखने के लिए खोल दिया गया है लेकिन कुछ नियम और कायदे लगाए गए है जिन्हे पर्यटकों  को पालन करना होगा। तो चलिए आगे पढ़ते है की ये नियम कौन- कौन से हैं। 

   सोटो बता दें की इस राज्य में 15 जून तक लोखड़ौन लगाया गया था जो की अब इसे खोल दिया गया है। और  अब यंहा सुबह 9  बजे से लेकर 5 बजे तक बाजार और छोटी दुकानों को खोल दिया गया है लेकिन दोस्तों सरकार की तरफ से होटलों को खोलने की अनुमति नहीं दी गई है।  

  और दूसरे राज्यों से जाने वाले लोगो को अपने कोरोना निगेटिव रिपोर्ट लाने की जरुरत नहीं है। यंग साम को 5 बजे से सुबह 5 बजे तक कोरोना नाईट कर्फु लगेगा।  यदि आप यंहा आ रहे है तो आपको स्मार्ट सिटी के वेब पोर्टल पर पहले पंजीकृत करना होगा ये आप अपने मोबाईल या कंप्यूटर द्वारा कर सकते ये इस लिंक से http://smartcitydehradun.uk.gov.in/  और दोस्तों आप कोरोना काल में उत्तराखंड में जाने के लिए कोई ज्यादा पाबन्दी नहीं है। आप जा  सकते है और उत्तराखंड की पहाड़ियों का लुफ्त उठा सकते है। 

   दोस्तों आप अपने जरुरत के सामान को बैग में पैक कर के ले जा सकते है।  क्यूंकि यदि हमारे पास हमारी जरुरत की चीजे हमरे साथ रहती है तो हम उसे जरुरत पड़ने पर स्तेमाल कल लेते है अन्यथा हमें उस वस्तु को खरीदना पद जाता है।  

    उत्तराखंड की सुंदरता देखने लायक बनती है जैसे मनो हम कोई जानत में आ चुके है।  तो चलिए हम उत्तराखंड के कुछ ऐसे स्थान के बारे में जानते है जो देखने में बेहद खूबसूरत हैं। 


 मुक्तेस्वर झील  -  दोस्तों मुक्तेस्वर झील नैनीताल से 46 किलोमीटर की दुरी पर है। मुक्तेस्वर झील देखने में बेहद अच्छा लगता है यंहा सर्दी के मौसम में बर्फ़बारी होती है। 

   तपोवन - दोस्तों तपोवन एक ऐसी जगह है जंहा से हिमलया की बड़ी बड़ी चोटियां दूर तक दिखाई देती है यंहा एक बहुत बड़ा टर्नल है।  ये गायत्री हिमनद से 6 किलोमीटर की दुरी पर है।  

  देवप्रयाग -


दोस्तों उत्तराखंड देवताओ का स्थान मन जाता है।  यही से माता गंगा का जन्म होता है दोस्तों देवप्रयाग एक ऐसी जगह है जंहा अलकनंदा नदी और भागीरथी नदी का संगम होता है और गंगा नदी का निर्माण होता है।  दोस्तों देवप्रयाग पांच प्रयागों में से एक है। मन जाता है की जब भागीरथी जी ने गंगा माँ को धरती पर उतरने के लये मनाया तब 33 करोड़ देबि देवता भी स्वर्ग से यंहा देवप्रयाग में उतरे थे। यह एक सुन्दर स्थान होने के साथ साथ ही ये एक देव् भूमि है जंहा अप्प भगवान की पूजा भी कर सकते है। 



 

शुक्रवार, 18 जून 2021

इंदौर से 100 किलोमीटर की दुरी पर घूमने का स्थान,INDORE TRAVEL

 इंदौर से 100 किलोमीटर की दुरी पर घूमने का स्थान

इंदौर से 100 किलोमीटर की दुरी पर घूमने का स्थान


  दोस्तों इंदौर मध्य प्रदेश का एक सहर है जो की उज्जैन से 60 किलो मीटर की दुरी पर और देवास से 43 किलो मीटर की दुरी पर स्थित है। दोस्तों इंदौर एक ऐसा सहर है जंहा मध्य प्रदेश में अन्य सहर से ज्यादा आबादी रहती है।  इंदौर में इंडस्ट्रियल एरिया भी मौजूद है जिसके लिए दूर दूर से लोग इंदौर में एते है। 

    इंदौर में सिछा के लिए बहुत सरे स्कूल और कॉलेज मौजूद है जिसके कारन यंहा दूर दूर से छात्र सिक्छा ग्रहण करने एते है।  दोस्तों मई आप लोगों को बता दू की यदि आप इंदौर सहर में अये है और इंदौर के खूबसूरत और फेमस जगहों पर घूमना चाहते है तो मई आप लोगों को इंदौर की ओ जगहों  के बारे में बताऊंगा को की बहुत ही ज्यादा फेमस है। 

     दोस्तों वैसे तो  इंदौर में घूमने के लिए बहुत ही अच्छे- अच्छे स्थान है लेकिन मै आपलोगों को बताऊंगा की इंदौर से 100 किलोमीटर के अंदर में घूमने जाने या पिकनिक मानाने जाने के लिए ये सरे जगह बहुत ही बढ़िया रहेंगे ये जगह इंदौर के साथ साथ बहुत ही दूर तक फेमस है। 

  Ralamandal Abhyaranya रालामंडल अभ्यारण्य - 

दोस्तों रालामंडल अभ्यारण्य एक ऐसा जगह है जंहा बहुत ही ज्यादा हरियाली है , यदि आप प्राकृतिक और जंगलों में घूमना पसंद करते है तो ये जगह आपके लिए बेहद पसंद आएगी क्यंकि दोस्तों रालामंडल अभ्यारण्य एक बेहद बड़ा जंगल जैसा  है। ये जगह इंदौर से 12 किलो मीटर की दुरी पर है। 


    Lotus Valley लोटस भैली  -

  दोस्तों ये लोटस भैली इंदौर से केवल 21 किलो मीटर की दुरी पर है , दोस्तों ये लोटस पार्क एक ऐसा पार्क है जिसकी खूबसूरती जम्बू कश्मीर के जैसा है। दोस्तों इस पार्क को एशिया (asia) की सबसे बड़ी लोटस वैली मन जाता है यंहा की खूबसूरती वास्तव में देखने लायक है वैसे तो इस जगह को बहुत काम लोग जानते है पर ये पार्क गुलावट (gulawat) गांव में है। यंहा बहुत बड़ा तालाब है जो की केवल गुलाबो से ढाका रहता है और यंहा पर बगुचे जैसा है अधिकतर यंहा बांस की झड़े मिलती है। 


     Tincha Fall तिंछा फॉल - 

इंदौर से 100 किलोमीटर की दुरी पर घूमने का स्थान


दोस्तों तिंछा फॉल भी पिलकनिक मानाने के लिए या छुटियों में घूमने जाने के लिए बहुत ही बढ़िया स्थान है यंहा पर बहुत बड़ा वाटर फॉल यानि झरने है। ये इंदौर से महज 24 किलो मीटर की दुरी पर स्तित है। 


    Ahilya Bai Fort अहिल्या बाई फोर्ट

दोस्तों यदि आप कोई किला या राजा महाराजाओ के रिलेटेड आप देखना पसंद करते है तो , आपके लिए अहिल्या बाई का किला देखना बहुत ही बढ़िया और सुन्दर होगा।  ये किला महेस्वर में है , ये इंदौर से लगभग 97 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। 

     दोस्तों अहिल्या बाई का किला देखने लायक बहुत ही बढ़िया स्थान है जो की नर्मदा नदी के किनारे बना हुआ है।  यंहा पर अहिल्या माता की प्रतिमा है जो उनके हाँथ में शिवलिंग लिए हुए बनाया गया है , अहिल्या माता का प्रतिमा की छाया नर्मदा नदी में दिखाई देती है। ये एक खूबसूरत पर्यटक स्थल है। यंहा जाने के बाद आप नर्मदा नदी में स्नान भी कर सकते है। 

     

    Janapav hill जाना पाव की पहाड़ी -  

दोस्तों क्या आप जानते है की भगवान परसुराम का जन्म स्थान कान्हा पर है ? नहीं तो दोस्तों जानापाव की पहाड़ी ही ओ जगह है जंहा भगवान परसुराम जा जन्म हुआ था ( खैर कई लोगों को पता होगा ) दोस्तों जानापाव की पहाड़ी भी घूमने जाने के लिए बहुत ही स्थान है। ये इंदौर से करीबन 28 किलो मीटर की दुरी और इंदौर में महू तहसील के हासलपुर गांव में स्थित है। 


सोमवार, 14 जून 2021

प्रयागराज सहर और यंहा का कुम्भ मेला

 प्रयागराज सहर | PRAGRAJ CITY - 

    इलाहबाद दोस्तों आज इस पोस्ट में जिस सहर के बारे में बात करेंगे उसका नाम है प्प्रयागराज जो पहले इलाहबाद नाम से जाना जाता था।  लेकिन दोस्तों आपको जान कर हैरानी होगी की इस प्रयागराज का नाम इलाहबाद के भी पहले प्रयागराज ही था।  1500 इसबी से मुस्लिम सासको द्वारा इसका नाम प्रयागराज से बदल कर इलाहबाद रखा दिया गया था।अकबर ने यंहा 1574 ईस्वी में किले का नीव राखी थी।   इसके बाद सन 2018 से तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा इसका नाम इलाहबाद से बदल कर फिर प्रयागराज रख दिया गया।

          प्रयागराज एक ऐसा सहर है जंहा हिन्दुओ के लिए बहुत ज्यादा तीर्थ स्थान है। ये लखनऊ से 201 किलोमीटर की दुरी पर है।   दोस्तों यंहा पर तिन नदियों का मिलान होता है , गंगा , यमुना  और सस्वती इन तीनो नदियों का संगम ही त्रिवेणी संगम कहलाता है।  इस नगर को कई नमो से  जाना जाता ही जैसे  संगम नगरी , कुम्भ नगरी अदि है।  दोस्तों ये सहर उत्तर प्रदेश के पुरवा भाग में स्थित है।

      इलाहबाद यानि प्रयाग राज की विश्वविद्यालय का प्रथम कुलपति  प्रोफ़ेसर राजेंद्र प्रसाद जी थे। 

       प्रयाग राज एक प्राचीन सहर है यंहा सुरु से तीर्थ करने के लिए लोग दूर दूर से एते है दोस्तों यंहा पर 12 वर्ष बाद महँ कुम्भ का ममेला लगता है जोसमे काफि दूर दूर से लोग एते है यंहा हिमालयो में बेस साधु संत भी इस कुम्भ के मेले में स्नान करने एते है।

         प्रयागराज सहर और यंहा का कुम्भ मेला सदियों से चलते आ रहा है। ऐसा हिन्दू मान्यताओं के आधार पर  माना  जाता है की भगवान ब्रह्मा जीने सृस्टि की रचना करने के बाद यही प्रयाग में उन्होंने यज्ञ किया था जो ये प्रथम यज्ञ था इसके वजह से प्र. यानि प्रथम और यज्ञ इस लिए इसका नाम प्रयाग रखा गया 

    दोस्तों यंहा पर ऐतिहासिक स्थान भी है जो दरसन करने लायक है जिनका नाम मई निचे बताता हूँ - जैसे इलाहबाद (प्रयागराज ) किला ,स्वराज्य भवन ,आनंद भवन, रानी महल अदि है। 

    इलाहबाद किला प्रयागराज में संगम के निकट बनाया गया है। ये किला मुग़ल सम्राट अकबर के द्वारा  1583 ईस्वी में बनवाया गया था। किले का कुछ भाग पर्यटकों के लिए खोला गया है।  इस किले में तीन मीनार हैं यंहा पर लोगों को किले का अशोक स्तम्भ , जोधा बाई महल और सरस्वती कूप केवल देखने की इजाजत है। 

   दरसनिक स्थल - संगम , हनुमान मंदिर, शंकर बिमान मंडपम,हनुमत निकेतन ( सिविल लाइन में ), सरस्वती कूप,(किले के भीतर स्थित), समुन्द्र कूप ( गंगा पर स्तित ), मनकामेश्वर मंदिर , शिव कुटी ( गंगा नदी के किनारे ) अदि है  

   दोस्तों प्रयाग में गंगा के किनारे बहुत से घाट है जहाँ पर लोगो का स्नान और पूजा पथ होता है , जैसे - रसूलाल घाट , फाफामऊ घाट यमुना किनारे - सरस्वती खत , काली घाट, बलुआ घाट ,औरल घाट, गायघाट और बरगद घाट  अदि है।

      इलाहबाद का मसहूर खाने वाला चीज नमकीन खाजा  है , अक्सर आपलोग खाजा मीठी चीनी वाली खाये होंगे लेकिन इलाहबाद में नमकीन वाली खाजा मिलती है जो माघ में मेले में लीलता है लोग इसे चटनी के साथ कहते है।

   इलाहबाद के कुछ  खूबसूरत जगह - दोस्तों इलाहबाद में भी घूमने का बहुत ही बढ़िया स्थान है यदि आप इलाहबाद जाते है तो आप इन जगहों पर अवस्य घूमे जैसे -   मिंटो पार्क , नई यमुना ब्रिज ,आल सेंटस कैथेड्रल ,आनंद भवन ,