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सोमवार, 14 जून 2021

प्रयागराज सहर और यंहा का कुम्भ मेला

 प्रयागराज सहर | PRAGRAJ CITY - 

    इलाहबाद दोस्तों आज इस पोस्ट में जिस सहर के बारे में बात करेंगे उसका नाम है प्प्रयागराज जो पहले इलाहबाद नाम से जाना जाता था।  लेकिन दोस्तों आपको जान कर हैरानी होगी की इस प्रयागराज का नाम इलाहबाद के भी पहले प्रयागराज ही था।  1500 इसबी से मुस्लिम सासको द्वारा इसका नाम प्रयागराज से बदल कर इलाहबाद रखा दिया गया था।अकबर ने यंहा 1574 ईस्वी में किले का नीव राखी थी।   इसके बाद सन 2018 से तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा इसका नाम इलाहबाद से बदल कर फिर प्रयागराज रख दिया गया।

          प्रयागराज एक ऐसा सहर है जंहा हिन्दुओ के लिए बहुत ज्यादा तीर्थ स्थान है। ये लखनऊ से 201 किलोमीटर की दुरी पर है।   दोस्तों यंहा पर तिन नदियों का मिलान होता है , गंगा , यमुना  और सस्वती इन तीनो नदियों का संगम ही त्रिवेणी संगम कहलाता है।  इस नगर को कई नमो से  जाना जाता ही जैसे  संगम नगरी , कुम्भ नगरी अदि है।  दोस्तों ये सहर उत्तर प्रदेश के पुरवा भाग में स्थित है।

      इलाहबाद यानि प्रयाग राज की विश्वविद्यालय का प्रथम कुलपति  प्रोफ़ेसर राजेंद्र प्रसाद जी थे। 

       प्रयाग राज एक प्राचीन सहर है यंहा सुरु से तीर्थ करने के लिए लोग दूर दूर से एते है दोस्तों यंहा पर 12 वर्ष बाद महँ कुम्भ का ममेला लगता है जोसमे काफि दूर दूर से लोग एते है यंहा हिमालयो में बेस साधु संत भी इस कुम्भ के मेले में स्नान करने एते है।

         प्रयागराज सहर और यंहा का कुम्भ मेला सदियों से चलते आ रहा है। ऐसा हिन्दू मान्यताओं के आधार पर  माना  जाता है की भगवान ब्रह्मा जीने सृस्टि की रचना करने के बाद यही प्रयाग में उन्होंने यज्ञ किया था जो ये प्रथम यज्ञ था इसके वजह से प्र. यानि प्रथम और यज्ञ इस लिए इसका नाम प्रयाग रखा गया 

    दोस्तों यंहा पर ऐतिहासिक स्थान भी है जो दरसन करने लायक है जिनका नाम मई निचे बताता हूँ - जैसे इलाहबाद (प्रयागराज ) किला ,स्वराज्य भवन ,आनंद भवन, रानी महल अदि है। 

    इलाहबाद किला प्रयागराज में संगम के निकट बनाया गया है। ये किला मुग़ल सम्राट अकबर के द्वारा  1583 ईस्वी में बनवाया गया था। किले का कुछ भाग पर्यटकों के लिए खोला गया है।  इस किले में तीन मीनार हैं यंहा पर लोगों को किले का अशोक स्तम्भ , जोधा बाई महल और सरस्वती कूप केवल देखने की इजाजत है। 

   दरसनिक स्थल - संगम , हनुमान मंदिर, शंकर बिमान मंडपम,हनुमत निकेतन ( सिविल लाइन में ), सरस्वती कूप,(किले के भीतर स्थित), समुन्द्र कूप ( गंगा पर स्तित ), मनकामेश्वर मंदिर , शिव कुटी ( गंगा नदी के किनारे ) अदि है  

   दोस्तों प्रयाग में गंगा के किनारे बहुत से घाट है जहाँ पर लोगो का स्नान और पूजा पथ होता है , जैसे - रसूलाल घाट , फाफामऊ घाट यमुना किनारे - सरस्वती खत , काली घाट, बलुआ घाट ,औरल घाट, गायघाट और बरगद घाट  अदि है।

      इलाहबाद का मसहूर खाने वाला चीज नमकीन खाजा  है , अक्सर आपलोग खाजा मीठी चीनी वाली खाये होंगे लेकिन इलाहबाद में नमकीन वाली खाजा मिलती है जो माघ में मेले में लीलता है लोग इसे चटनी के साथ कहते है।

   इलाहबाद के कुछ  खूबसूरत जगह - दोस्तों इलाहबाद में भी घूमने का बहुत ही बढ़िया स्थान है यदि आप इलाहबाद जाते है तो आप इन जगहों पर अवस्य घूमे जैसे -   मिंटो पार्क , नई यमुना ब्रिज ,आल सेंटस कैथेड्रल ,आनंद भवन , 

   

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