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शुक्रवार, 30 अप्रैल 2021

कोरोनावायरस में स्वस्थ रहने का उपाय



नमस्कार दोस्तों , आज के समाय में हमारी दिनचर्या और खान पान की वजह से हमारे सरीर में ओ ताकत और एनर्जी नहीं बची जो पहले के लोगों में थी।  पहले के लोगों के खान पान सुध थी और साथ ही उनकी दिनचर्या आज के लोगो जैसा नहीं था  जिसके वजह से पहले आज की अपेक्छा बीमारिया काम थी , जैसे जैसे हमारे पास इतनी सुख सुबिधाये होने लगी है और हमारा खान पैन भी बिगड़ गया है जिसके वजह से आज हमें बहुत साडी बीमारियों से जूझना पड रहा है। 




   जैसे अभी एक बीमारी चली है जिसका नाम है  कोरोना (CORONA ) ये बीमारी लगभग  दिसंबर या फिर जनवरी में हमारे देश भारत में आया था।  और ये कोरोना नमक बीमारी ने बहुत से लोगों का जान भी लिया था। और अब यानि 2021 में भी ये बीमारी वापिस फिर से आगया।  अभी का जो ये लहार है इसमें पहले से ज्यादा लोगों की मौतें हो रही है। डाक्टरों के तरफ से पता चला है की ये कोरोना पहले की अपेक्छा अभी बहुत जल्दी ही फेफड़ों को ख़राब कर रही है जिसके वजह से लोंगो को स्वांस लेने में परेशानी हो रही है।  और इंसान की डेथ हो जा रही है।  इस कोरोना को से कैसे लड़ा जाये और बचा जाये मै इस पोस्ट में आप सबलोगों को बताने जा रहा हूँ। 

   देखिये इस  कोरोना बीमारी में डाक्टर बता रहे हैं की जिसका रोगप्रतिरोधक छमता अच्छा   है ओ इंसान बच रहे हैं। तो आज हम जानेंगे की अपना रोगप्रतिरोधक छमता कैसे बढ़ाएं। 

  1.  हमें अपने सरीर का इम्यून सिस्टम रोगप्रतिरोधक छमता बढ़ने के लिए हमें अपने सरीर को एक्टिव रखना चाहिए।  शारीरिक काम करना चाहिए क्यूंकि सरीरक काम करने से हमारे सरीर से पसीने बहार निकलते है जिससे  सरीर की एक्स्ट्रा फैट बहार निकालता है और हमारे सरीर को चुस्त फुर्त बनाने के साथ हमारे रोगप्रतिरोधक छमता को भी मजबूत करता है। 
  2. हमें सुबह जल्दी उठाना चाहिए और खुली हवा में टहलना चाहिए जिससे हमारे फेफड़ो में सुध ऑक्सीजन पंहुचे।  हम इस कोरोना काल में अधिकतर मॉस्क पहन कर रहते है जिससे हमारे फेफड़ों में अधिकतर ऑक्सीजन नहीं पहुंचता जिसके कारन हमारे सरीर में ऑक्सीजन की कमी होती है।  सुबह के समय ज्यादा पोलुशन नहीं होता और ऑक्सीजन की हमें अच्छे मात्रा में मिलता है। 
  3. प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर योगा और प्राणायाम करना चाहिए। कोरोना एक स्वांस नलिकाओं और फेफड़ों  को प्रभावित करने वाला रोग है , इस लिए प्राणायाम हमारे फेफड़ों को स्वस्थ रखेगा यदि आप कपालभाति प्राणायाम करते है तो आपके स्वांस नालियों में गर्मी उत्पन होता है और रोग प्रतिरोधक छमता मजबूत करता है। इसलिए हमें  प्रतिदिन सुबह उठ कर कपालभाति प्राणायाम करना चाहिए। 
  4. रोगप्रतिरोधक छमता बढ़ने के लिए हमारे रसोई घर में उपलब्ध मसाले भी दवा के काम करते है जैसे - लौंग , हल्दी , काली मिर्च , दालचीनी ये साडी चीजे आज कोरोना में अधिक इस्तेमाल हो रही है।  तो यदि आप प्रतिदिन सुबह या फिर सैम को सोते वक्त गुनगुने पानी में थोड़ा हल्दी दाल कर गरारा करते हैं तो कोरोना जैसा वायरस आपके गले से फेफड़ों तक नहीं पहुंच पता।  हमें प्रतिदिन काली मिर्च और हल्दी और दालचीनी को मिक्स करके काढ़ा बनाकर पीना चाहिए। 
  5. रोजाना अपने भोजन में निबो शामिल करना चाहिए क्यूंकि निबो में बिटामिन C अच्छे मात्रा में पाया जाता है और बिटामिन C हमारे सरीर का रोगप्रतिरोधक छमता बढ़ने में मदद कराती है।  निबो के साथ अन्य खटे फलो में भी विटामिन C प्रचुर मात्रा में होता है जैसे - संतरा, मौसमी अदि फलों में। 
 कोरोना वायरस से बचने के कुछ आसान उपाय - 



  1. कोरोना से बचने के लिए हमें अपने हांथो को बार बार साबुन से धोते रहना चाहिए।  
  1. हांथो को सेनेटाइजर से बार बार धोना चाहिए , और अपने हांथो से मुंह और नाक को नहीं छूना चाहिए। 
  2. जब भी अपने घर से बहार निकले तब हमें मास्क अवस्य लगनी चाहिए , ज्यादा भीड़ भांड जगह पर नहीं जाना चाहिए। 
  3. लोगों से 2 फिट की दुरी बनाकर रहना चाहिए। 
  4. यदि किसी ब्यक्ति को सर्दी जुकाम है तो उससे दूर ही रहना चाहिए और यदि कोई ब्यक्ति छीकता या खांसता है तो उस ब्यक्ति से अधिक दुरी बना लेनी चाहिए। 

  5. अगर हमें जुकाम हुआ हो तो हमें हमेसा मैक्स पहनना चाहिए और अपने आप को सेनेटीज़र से साफ रखना चाहिए और गरम पानी और हल्दी से गरारा करना चाहिए। सुबह साम काढ़े का इस्तेमाल करना चाहिए। 


गुरुवार, 22 अप्रैल 2021

डाउनलोड इंस्टाग्राम रील वीडियो how download instagram reel video



 इंस्टाग्राम का रील वीडियो डाउनलोड कैसे करें -  


  नमस्कार दोस्तों आज मै आपलोगों को बताने वाला हूँ की इंस्टाग्राम का रील वीडियो कैसे डाउनलोड किया जाता है इस पोस्ट को लिखने का मेरा मेन मकसद यह है की बहुत से लोग इंस्टाग्राम के रील वीडियो (REEL VIDEO) देखते हैं तो यदि कोई वीडियो पसंद आ जाती है तो उस वीडियो को अपने व्हाट्सप्प स्टेटस , फेसबुक स्टेटस या फिर अपने दोस्तों को शेएर करना चाहते हैं। इस कारन ये बाटे हमेसा पूछा जाता है तो चलो दोस्तों आज हम इस पोस्ट में जानेंगे की इंस्टाग्राम के रील वीडियो डाउनलोड कैसे करते है। जबसे टिक टॉक (TIK TOK ) विडिओ भारत से हटा है तब से लोग इंस्टाग्राम (INSTAGRAM) के रील वीडियो को पसंद कर रहे हैं और लोखो के तादात में लोग इसपर वीडियो बना रहे है।  
     इंस्टाग्राम के रील वीडियो (REEL VIDEO) को डाउनलोड करने के लिए हमें अपने फ़ोन में कोई ऐप इंसटाल करने की जरूरत नहीं है केवल जैसे जैसे मई इस पोस्ट में बताता हूँ केवस उस तरह अप्प रील वीडियो को आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।
 
     इंस्टाग्राम के रील वीडियो (REEL VIDEO) को डाउनलोड करने के लिए हमें अपने फ़ोन में कोई ऐप इंसटाल करने की जरूरत नहीं है केवल जैसे जैसे मई इस पोस्ट में बताता हूँ केवस उस तरह अप्प रील वीडियो को आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं। 
  1. सबसे पहले हम इंस्टाग्राम (INSTAGRAM)  को ओपन करते है। 
  1. उसके बाद हम इंस्टाग्राम (INSTAGRAM) के रील वीडियो (REEL VIDEO ) पर जाते हैं। 
  1. और हम इन रील वीडियो ( REEL VIDEO ) को देखते है और वीडियो को पसंद करते है। 
  1. और जो वीडियो पसंद आ जाता है उस रील वीडियो (REEL VIDEO )  के निचे थ्री डॉट( THREE DOT) दिया रहता है उस थ्री डॉट(THREE DOT) पर क्लिक करते है।    
  1. उस थ्री डॉट पर क्लिक करके लिंक को कॉपी कर लेना 
  1. कॉपी करने के बाद आप लोग गूगल क्रोम (google chrom) ब्राउज़र में चले जाना है 
  1. फिर अपने ब्राउजर के सर्च बॉक्स में सर्च करना है , इंस्टाग्राम रील वीडियो डाउनलोड (instagram reel video download) 
  1. इसके बाद जो पहला लिंक आएगा उसपर क्लिक करना और ओपन हो जाये गा। 
उसमे एक सर्च बॉक्स देगा उसमे लिंक को पेस्ट (Pest ) कर देना है। फिर निचे डाउनलोड का ऑप्सन होगा उसपर क्लिक करना है और फिर आपका रील वीडियो सामने आ जायेगा फिर उसे डाउनलोड कर लेना है 

    दोस्तों आप लोगो को मै इससे भी आसान उपाय बता देता हूँ।  अगर अप्प इंस्टाग्राम के रील वीडियो को आसानी से डाउनलोड करना चाहते हो तो इसके लिए आप लोगो को एक एप्लीकेसन की जरुरत पड़ेगी जो आपलोगों को गूगल प्लेस्टोर (GOOGLE PLAYSTORE) से मिल जायेगा।  आपलोगों को कुछ नहीं करना है सिर्फ प्लेस्टोर (PLAYSTORE) में जाना हिअ और वंहा सर्च करना है - INSTAGRAM REEL VIDEO DOWNLODER , आपलोगों को बहुत सरे एप्प मिल जायेंगे उसे अपने फोन में इंसटाल करलेना है और आप लोगो को इस अप्प को ओपन करना है।  ओपन करने के बाद आपलोगों से इंस्टाग्राम के लॉगिन आई डी से लॉगिन करने को कहेगा और फिर आप लोग उसमे रील वीडियो से कॉपी की गई लिंक को पेस्ट करके वीडियो को डाउनलोड कर सकते है और इंस्टाग्राम वीडियो को अपने फोन मैमोरी से किसी व्हाट्सअप , फेसबुक के स्टेटस में शेएर कर सकते है।  और इस वीडियो का मजा ले सकते हैं।   

तो दोस्तों ये पोस्ट आप लोगो को कैसा लगा आप हमें कमेंट करके जरूर बताये धन्यबद। 

डाउनलोड इंस्टाग्राम रील वीडियो

सोमवार, 12 अप्रैल 2021

कशी छेत्र किसे कहते है ,kashi chetra Kise kahte hai

  कशी छेत्र किसे कहते है  - 

कशी छेत्र पौराणिक नगर है जो की वर्तमान में वाराणसी में बसा है। कशी एक भारत के प्राचीन नगरों में से एक नगर था पर आज भी इसे कशी ही कहा जाता है।  कशी एक देव स्थान है कशी का जिक्र पौराणिक ग्रंथो में भी मिलता है आज भी लोग कशी में महत्वा को जानते हुए वंहा जाते है। कशी छेत्र की सुंदरता वंहा की मंदिरें , नदिया और कशी के घाट देखने लायक है। 


    कशी गंगा नदी के उत्तर में स्थित है और भारत के दक्छिण-पूर्व में स्तिथ है। कशी को वाराणसी भी कहा जाता है।  वाराणसी बहुत पुराना नाम वाराणसी ही था लेकिन लोकोच्चारण के वजह से बिच में इसका नाम बनारस हो गया था, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने फिर से इसका नाम वाराणसी रख दिया।

   

   कशी भगवान शिव का अस्थान है।  पहले के समाए में लोग अपना पूरा जीवन जीने के बाद जब मौत के किनारे एते थे तो अधिकांश लोगो की इक्छा होती की उनकी अंत एक अच्छे सो हो इस लिए कशी एते थे ओ मानते थे की कशी में मरने के बढ़ हमें मोक्छ की प्राप्ति होती है।  

 कशी का उल्लेख प्राचीन वेद ऋग वेद में मिलता है. यह पहले भगवान बिष्नु का स्थान था।  एक कथा है की एक बार  भगवान शिव ने क्रोध में आकर  ब्रम्हाजी का पांचवा सर काट दिया  था , तब उनके करतल में चिपक गया और उन्हें ब्रम्ह हत्या का पाप लग गया भगवान शिव ने 12 साल तक अनेक तीर्थ स्थनो पर भटकने के बाद जैसे ही कशी में प्रवेश किये उनका ब्रम्ह हत्या हैट गया और ये चीजे जिस स्थान पर हुई थी उस स्थान को कपालमोचन के नाम से जाना जाता है ये मंदिर भी प्रशिद्ध मंदिर है।  तब से ये कशी भगवान शिव को अच्छी लगाने लगी , उन्होंने भगवान विष्णु से अपने लिए मांगी तो भगवान  ने भगवान शिव को कशी को दे दिए।  तब से और आज तक कशी भगवान शिव की नगरी है। 




 कशी का उल्लेख अनेक हिन्दू ग्रंथो में मिलती है इससे सिद्ध होता है की कशी बहुत पुरनि धार्मिक अस्थान है।  कशी का उल्लेख महाभाराम में अनेक जगहों पर मिलता है  और जातक कथाओं में भी  कशी का उल्लेख मिलता है। कशी को भारत का 16 वं महाजनपद में गिना जाता था। कशी जातक कथाओं के अनुसार पहले बिद्या और ब्यापार के लिए प्रमुख स्थान था।  कशी को भरतवंस के राजा कास ने बसाया थे। 

 कशी में लगभग 1500 मंदिर है , जिसमे बिस्वनाथ ,संकट मोचन और दुर्गा मंदिर बिस्वा बिख्यात है।  बिस्वनाथ मंदिर को मध्य प्रदेश की रानी  'अहिल्या बाई'   ने बनवाया था और बिस्वनाथ मंदिर के ऊपर की गुम्बद को महाराणा रणजीत सिंह ने सोने से बनवाया था। संकट मोचन मंदिर को तुलसीदास जी ने बनाया था और दुर्गा मंदिर को मराठाओं ने बनवाया था। 

  यंहा पर कुछ प्रसिद्ध घाट भी है जैसे -दसस्वमेघ घाट , मर्णिकर्णिका घाट , हरिस्चन्द्र घाट और तुलसी घाट यह विस्वा बिख्यात है।  

शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021

कुत्तों का सामान्य इतिहास

 इस विचार में कोई असमानता नहीं है कि इस दुनिया में मनुष्य के निवास के शुरुआती दौर में उसने हमारे आधुनिक कुत्ते के किसी न किसी प्रकार के आदिवासी प्रतिनिधि को अपना दोस्त और साथी बनाया, और इसके बदले में वह जंगल के जानवरों से बचाने में अपनी सहायता के लिए, और अपनी भेड़ों और बकरियों की रखवाली करते हुए, उन्होंने इसे अपने भोजन का एक हिस्सा दिया, अपने आवास में एक कोना, और इस पर भरोसा करने और इसकी देखभाल करने के लिए बढ़े। संभवतः जानवर के लिए प्रेरित था। एक महिला और बच्चों द्वारा शुरुआती शिकारियों को बांधने और पाले जाने के लिए कुछ लाचारों द्वारा घर लाए जाने की स्थिति में साझेदारी की शुरुआत की संभावना अच्छी तरह से हो सकती है। बच्चों के लिए प्लेथिंग के रूप में घर में पेश किए जाने वाले कुत्तों को खुद को सम्मान और परिवार के सदस्यों के रूप में माना जाता है


दुनिया के लगभग सभी हिस्सों में एक स्वदेशी कुत्ते के परिवार के निशान पाए जाते हैं, एकमात्र अपवाद पश्चिम भारतीय द्वीप समूह, मेडागास्कर, मलायन द्वीपसमूह के पूर्वी द्वीप समूह, न्यूजीलैंड और पोलिनेशियन द्वीप हैं, जहां कोई संकेत नहीं है कि कोई भी है कुत्ता, भेड़िया या लोमड़ी एक सच्चे आदिवासी जानवर के रूप में मौजूद है। प्राचीन ओरिएंटल भूमि में, और आम तौर पर शुरुआती मंगोलियाई लोगों के बीच, कुत्ते सदियों से जंगली और भयंकर रूप से उपेक्षित रहे, पैक्स, गंट और भेड़िया-जैसे, यह सड़कों के माध्यम से और हर पूर्वी शहर की दीवारों के नीचे आज भी हैं। इसे मानवीय साहचर्य में बाँधने या इसे शालीनता में सुधारने का कोई प्रयास नहीं किया गया। यह तब तक नहीं है जब तक हम असीरिया और मिस्र की उच्च सभ्यताओं के रिकॉर्ड की जांच करने के लिए नहीं आते हैं कि हम किसी भी प्रकार के कैनाइन फार्म की खोज करते हैं।


फिलिस्तीन में कुत्ते की बहुत सराहना नहीं की गई थी, और पुराने और नए दोनों टेस्टामेंट में आमतौर पर "अशुद्ध जानवर" के रूप में तिरस्कार और अवमानना ​​के साथ  एकमात्र बाइबिल का भ्रम एपोक्रिफ़ल बुक ऑफ़ टोबाइट (v। 16) में होता है, "तो वे दोनों आगे बढ़ गए, और उनके साथ जवान आदमी का कुत्ता।"


कुत्ते की विभिन्न नस्लों की महान भीड़ और उनके आकार, अंक और सामान्य उपस्थिति में भारी अंतर ऐसे तथ्य हैं जिनसे यह विश्वास करना मुश्किल हो जाता है कि उनके पास एक सामान्य वंश हो सकता था। एक मास्टिफ और जापानी स्पैनियल, डियरहाउंड और फैशनेबल पोमेरेनियन, सेंट बर्नार्ड और मिनिएचर ब्लैक और टैन टेरियर के बीच अंतर के बारे में सोचता है, और एक सामान्य पूर्वज से उतरने की संभावना पर विचार करने में हैरान है। फिर भी असमानता शायर घोड़े और शेटलैंड टट्टू, शोरथोर्न और केरी मवेशियों, या पटागोनियन और पैग्मी के बीच से अधिक नहीं है; और सभी कुत्ते प्रजनकों को पता है कि अध्ययन के चयन से प्रकार और आकार में विविधता पैदा करना कितना आसान है।


इस प्रश्न को ठीक से समझने के लिए पहले भेड़िया और कुत्ते में संरचना की पहचान पर विचार करना आवश्यक है। संरचना की इस पहचान का अध्ययन दो जानवरों के आस-पास की प्रणाली, या कंकालों की तुलना में किया जा सकता है, जो इतनी बारीकी से एक दूसरे से मिलते जुलते हैं कि उनके स्थानान्तरण का आसानी से पता नहीं चलता।


कुत्ते की रीढ़ की हड्डी में सात कशेरुक होते हैं, पीठ में तेरह, कान में सात, तीन त्रिक कशेरुक और पूंछ में बीस से बीस होते हैं। कुत्ते और भेड़िये दोनों में तेरह जोड़े पसलियों के होते हैं, नौ सच्चे और चार झूठे होते हैं। प्रत्येक के बयालीस दांत होते हैं। वे दोनों पांच सामने और चार पंजे हैं, जबकि बाहरी भेड़िये में एक बड़े, नंगे-बंधे कुत्ते की उपस्थिति इतनी अधिक है कि एक का एक लोकप्रिय विवरण दूसरे के लिए काम करेगा।


न ही उनकी आदतें अलग हैं। भेड़िया की प्राकृतिक आवाज़ एक तेज़ आवाज़ है, लेकिन कुत्तों के साथ सीमित होने पर वह भौंकना सीख जाएगा। हालांकि वह मांसाहारी है, वह सब्जियां भी खाएगा, और जब वह बीमार होगा तो वह घास खाएगा। 

 भेड़िया के कूड़े में तीन से नौ शावक होते हैं, और ये इक्कीस दिनों के लिए अंधे होते हैं। उन्हें दो महीने के लिए चूसा जाता है, लेकिन उस समय के अंत में वे अपने डैम या यहां तक ​​कि उनके साहब द्वारा उनके लिए अव्यवस्थित आधा मांस खाने में सक्षम होते हैं।


सभी क्षेत्रों के मूल कुत्ते उन क्षेत्रों के मूल भेड़िया के आकार, रंग, रूप और आदत में निकटता से जुड़े होते हैं। इसमें से सबसे महत्वपूर्ण है

सोमवार, 5 अप्रैल 2021

गर्मी के मौसम में स्वस्थ रहने के तरीके

     गर्मी का मौसम ऐसा मौसम होता है जिसमे दिन बड़े होते हैं और लू चलता है। गर्मी के मौसम में सूर्य से आने वाली धुप पृथ्वी पर सीधी पड़ती है। जिसके वजह से गर्मी और उमस ज्यादा पड़ती है इस मौसम में सरीर का पानी बहुत जल्दी जल्दी सूखती है जिसके कारन हमें प्यास ज्यादा लगाती है। यदि हम अपने सरीर को पर्याप्त पानी की पूर्ति न करें तो हमारा सरीर दीहीड्रेट हो जाती है।  जिसके वजह से हमें बहुत सी परेशानिओ का सामना करना पड़ता है। हमारे सरीर से पानी की कमी होने के कारन हमारी पाचन क्रिया सही नहीं हो पति है पिसाब पिले रंग का होने लगता है। और होंठ सुख कर फटने लगते हैं और पानी की कमी से हमारे सरीर में कमजोरी भी होती है क्यों की अगर हमारे भोजन का पाचन सही नहीं होगा तो हमारे सरीर में बहुत प्रकार की बीमारिया होंगी और कमजोरी भी होगी। 




      हमें गर्मी के दिनों में सबसे पहली बात ये की हमें पर्याप्त पानी लेनी चाहिए।  ऐसे तो बोलै जाता है की पानी 5 से 6 लीटर पिणि चाहिए लेकिन आपको जितना प्यास लगे आपको पानी किनी चाहिए और पानी को आराम - आराम से घूंट - घूंट कर के पीना चाहिए।  एक ही बार में ज्यादा पानी भी नहीं पिणि चाहिए। अगर हम एक ही बार में ज्यादा पानी पि लेते है तो हमारे किडनी को ज्यादा ऊर्जा की अवस्यक्ता होती है। इसलिए हमें पानी भी उतना ही पीना चाहिए जितना जरुरी और प्यास हो और पानी को बैठ कर आराम से पीना चाहिए। 
    गर्मी के दिनों में नियमित समय से भोजन करना चाहिए वैसे तो हमें हमेसा सही समय पर भोजन करलेना चाहिए , जैसे कई लोग होते है सुबह देर तक सोने के बाद लेट से उठाते है तो ओ लोग सुबह का नास्ता 9 या 10 बजे तक करते है जो की गलत है। हमें नास्ता सुबह 7 से 8 बजे तक कर लेनी चाहिए जो की दोपहर के भोजन तक अच्छे से पच जाता है ऐसे ही हमें भूख लगाने पर और सही समय पर हल्का भोजन करना चाहिए।  हमरे सरीर में होने वाले अधिकांश रोग भोजन को सही तरीके से पाचन नहीं होने के कारन होता है। इस लिए यदि हम फिट और निरोग रहना चाहते है तो हमें भोजन को अच्छे से पचना चाहिए। 
    गर्मियों में डेली ब्यायाम करना चाहिए देखिये ब्यायाम EXERCISE करने से हमारे सरीर से जो पसीना बहार निकलता है उससे हमारे रोम छिद्र में जमी हुई गन्दगी बहार निकल जाती है।  क्यूंकि त्वचा पर जमी गन्दगी के कारन भी बहुत से रोग होते है।  और ब्यायाम के और भी फायदे होते है जो की आप लोग जानते ही होंगे।  
   गर्मियों के दिनों में सुबह या साम हमें गार्डन में टहलने जाना चाहिए ब्यायाम EXERCISE के अलावा मैंने टहलने को इस लिए कहा क्यूंकि हम दिन भर अपने काम के चलते पंखे कूलर या फिर  ए सी में रहते है लेकिन इन सब हवाओ की अपेक्छा प्रकिर्तिक की हवा हमारे सरीर को तरोताजा कर देती है इस लिए हमें सुबह खुली हवा में टहलना चाहिए।