कशी छेत्र किसे कहते है -
कशी छेत्र पौराणिक नगर है जो की वर्तमान में वाराणसी में बसा है। कशी एक भारत के प्राचीन नगरों में से एक नगर था पर आज भी इसे कशी ही कहा जाता है। कशी एक देव स्थान है कशी का जिक्र पौराणिक ग्रंथो में भी मिलता है आज भी लोग कशी में महत्वा को जानते हुए वंहा जाते है। कशी छेत्र की सुंदरता वंहा की मंदिरें , नदिया और कशी के घाट देखने लायक है।
कशी गंगा नदी के उत्तर में स्थित है और भारत के दक्छिण-पूर्व में स्तिथ है। कशी को वाराणसी भी कहा जाता है। वाराणसी बहुत पुराना नाम वाराणसी ही था लेकिन लोकोच्चारण के वजह से बिच में इसका नाम बनारस हो गया था, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने फिर से इसका नाम वाराणसी रख दिया।
कशी भगवान शिव का अस्थान है। पहले के समाए में लोग अपना पूरा जीवन जीने के बाद जब मौत के किनारे एते थे तो अधिकांश लोगो की इक्छा होती की उनकी अंत एक अच्छे सो हो इस लिए कशी एते थे ओ मानते थे की कशी में मरने के बढ़ हमें मोक्छ की प्राप्ति होती है।
कशी का उल्लेख प्राचीन वेद ऋग वेद में मिलता है. यह पहले भगवान बिष्नु का स्थान था। एक कथा है की एक बार भगवान शिव ने क्रोध में आकर ब्रम्हाजी का पांचवा सर काट दिया था , तब उनके करतल में चिपक गया और उन्हें ब्रम्ह हत्या का पाप लग गया भगवान शिव ने 12 साल तक अनेक तीर्थ स्थनो पर भटकने के बाद जैसे ही कशी में प्रवेश किये उनका ब्रम्ह हत्या हैट गया और ये चीजे जिस स्थान पर हुई थी उस स्थान को कपालमोचन के नाम से जाना जाता है ये मंदिर भी प्रशिद्ध मंदिर है। तब से ये कशी भगवान शिव को अच्छी लगाने लगी , उन्होंने भगवान विष्णु से अपने लिए मांगी तो भगवान ने भगवान शिव को कशी को दे दिए। तब से और आज तक कशी भगवान शिव की नगरी है।
कशी का उल्लेख अनेक हिन्दू ग्रंथो में मिलती है इससे सिद्ध होता है की कशी बहुत पुरनि धार्मिक अस्थान है। कशी का उल्लेख महाभाराम में अनेक जगहों पर मिलता है और जातक कथाओं में भी कशी का उल्लेख मिलता है। कशी को भारत का 16 वं महाजनपद में गिना जाता था। कशी जातक कथाओं के अनुसार पहले बिद्या और ब्यापार के लिए प्रमुख स्थान था। कशी को भरतवंस के राजा कास ने बसाया थे।
कशी में लगभग 1500 मंदिर है , जिसमे बिस्वनाथ ,संकट मोचन और दुर्गा मंदिर बिस्वा बिख्यात है। बिस्वनाथ मंदिर को मध्य प्रदेश की रानी 'अहिल्या बाई' ने बनवाया था और बिस्वनाथ मंदिर के ऊपर की गुम्बद को महाराणा रणजीत सिंह ने सोने से बनवाया था। संकट मोचन मंदिर को तुलसीदास जी ने बनाया था और दुर्गा मंदिर को मराठाओं ने बनवाया था।
यंहा पर कुछ प्रसिद्ध घाट भी है जैसे -दसस्वमेघ घाट , मर्णिकर्णिका घाट , हरिस्चन्द्र घाट और तुलसी घाट यह विस्वा बिख्यात है।
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