मिटी कितने प्रकार की होती है - मिटी के कई प्रकार होते है। दोस्तों कई बार कम्पटीसन एग्जाम में हमें पूछ दिया जाता है की मिटी कितने प्रकार की होती है। इनके गुंड क्या - क्या है तो चलिए आज में इस पोस्ट में आपको मिटी के बारे में बताऊंगा की मिटी कितने प्रकार की होती है। इनके क्या - क्या गुण है। मिटी के अलग अलग प्रकार होने के कारन उस पर उपज का भी प्रभाव पड़ता है इसी लिए हर राज्य या छेत्र में अलग -अलग उपज की जाती है।
मिटी के प्रकार -
- जलोढ़ मिटी (Alluvial Soil )
- लाल मिटी ( Red Soil )
- काली मिटी (Black Soil )
- लैटेराइड मिटी , बलुआ मिटी ( Laterite Soil )
- रेतीली मिटी (रेगिस्तानी , Desert Soil )
जलोढ़ मिटी को दोमट मिटी भी कहा जाता है। नदियों द्वारा बहा कर ले गई मिटी को जलोढ़ मिटी कहते हैं। यह मिटी उपजाउन मिटी होती है। जलोढ़ मिटी उत्तर भारत में पाई जाती है। यह मिटी राज्यस्थान के उत्तरी भाग , बिहार, मध्य प्रदेश ,उत्तर प्रदेश, पंजाब के राज्यों में पाया जाता है। यह मिटी कृषि के लिए बहुत उपयोगी है।
लाल मिटी -
यह मिटी चटानो से कटी हुई मिटी होती है। यह माट्टी अधिकतर भारत के दक्छिण भागो में पाई जाती है।
काली मिटी -
इस मिटी को कपास की मिटी या रगड़ की मिटी भी कहते है। क्योकि इस मिटी में कपास के खेती बहुत अच्छी होती है। इस मिटी में नमी को देर तक नमी बनाये रखने का गुण होती है। काली मिटी अधिकतर लावा प्रदेश में पाई जाती है। ये मिटी अधिकतर महाराष्ट्र , गुजरात, मध्य प्रदेश , आंध्र प्रदेश ,के उत्तरी छेत्र में पाई जाती है
लैटेरिड मिटी -
ये मिटी दच्छिद - पूर्व में पाई जाती है।
रेतीली मिटी -
यह मिटी राज्यस्थान के थार प्रदेश में पाई जाती है ,पंजाब में दक्छिडी भाग में भी पाई जाती है।
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