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सोमवार, 8 फ़रवरी 2021

अयोध्या नगर और वंहा घूमने के पर्यटक अस्थल

                                        अयोध्या नगर




अयोध्या नगर का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में भगवान श्री राम का स्मरण होने लगता है।  ओ इस लिए क्योंकि भगवान श्री राम का जन्म अयोध्या नगर में ही हुआ था। अयोध्या भारत (india) देश के उत्तार प्रदेश राज्य में बसा है। इस जिले में सरयू नदी है। इस नदी की 160 किलो मीटर की लम्बाई है।  यह नदी अयोध्या जिले से होकर बहती है। इस नदी का हिन्दू धर्म में बहोत ही महातम है। सरयू नदी का वरडन ऋग वेद में बिस्तर से किया गया है। सरयू नदी हिमालय से निकल कर उत्तर भारत में बहती हुई बलिआ और छपरा के बिच मिलती है।







 अयोध्या भगवान राम की जन्म भूमि है। और अज यंहा भगवान राम की मंदिर बन रहा है।  इस लिए हम सभी को यंहा जाना चाहिए।  यंहा देखने लायक भी बहोत सरे अस्थान है।  यंहा लोग दरसन करने जाते है तो सरयू नदी में अस्नान कर के भीड़ दरसन करते हैं।  मे आपलोगो को इस पोस्ट में अयोध्या में दरसन और घूमने का असतं बताऊंगा। जो की बहुत ही बढियाँ असतं है।  जंहा आप लोग अयोध्या जा कर घूम सकते हैं।  तो चलिए उन जगहों के बारे में जानते हैं। 

1. सबसे पहले तो अयोध्या में घूमने के लिए बढ़िया अस्थान है श्री राम जन्म भूमि। श्री राम जन्म भूमि वह जगह है जंहा भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। और यंहा एक मंदिर भी बना था।  फिर मंदिर बाद में तोड़वा दी गई थी लेकिन आज फिर हमारे भगवान श्री राम की मंदिर मन रही है ये कार्य श्री नरेंद्र मोदी (P.M) की राज्य में बन रहा है।  यह एक बहुत ही बढियाँ अस्थान है गुमने का और दरसन करने का। 

2. त्रेता का ठाकुर , यह मंदिर यानि त्रेता का ठाकुर सरयू नदी के तात पर बना एक प्राचीन मंडी है। इस मंडी में भगवान श्री राम की मूर्ति राखी गई है जो प्राचीन समय में काळए रेट के पत्थरों से उकेरी गई थी। और ये मंडी वही अस्थान पर है जंहा श्री राम का अश्वमेघ यज्ञ हुआ था। इस मंडी को दरसन तो आप सभी को करना चाहिए। 

3. कनक भवन  यंहा आपको जरूर जाना चाहिए बहुत ही बढ़िया जगह है।  ओ इस लिए की कहा जाता है की ये भवन भगवान राम और माता जानकी के बिवाह के बाद भगवान राम की सावटेली माँ कैकई ने माता सीता को दिया था।  लेकइन बता दे की बाद में इस मंदिर को परमार वंस के राजा विक्रमादित्य पुनर्निर्माण करवाए थे। जो 1891 ईसवी में बना था। 

4.  मोती महल अयोध्या का आकर्सक अस्थल में से एक अस्थल ये भी है।  ये महल अयोध्या से कुछ दूर फैजा बाद में है। इस महल का निरमान 1743 में हुआ था।  






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