मणिकर्णिका घाट वाराणसी के बारे में -
किसी ज़माने में लोग बोला करते थे आपकी जिंदगी के आखिरी दिनों में आपको कशी KASHI (VARANASI) चले जाना चाहिए , कहा जाता है काशी में मरने पर आत्मा को सरीर से निकलते समय ज्यादा कास्ट नहीं झेलने पड़ते। दोस्तों बनारस जिसका नाम अभी वाराणसी(VARANASI ) है में स्थित भोलेनाथ की विस्वनाथ VISHWANATH शिवलिंग है जो की गंगा नदी GANGA RIVER के किनारे बिराजमान है जो की 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है। महादेव के इस चैत्र को ही काशी छेत्र कहा जाता है कशी छेत्र वेदों के अनुसार बहुत ही धार्मिक स्थान है। वाराणसी में गंगा किनारे बहुत सरे घाट बने हुए है जिनमे एक है , मणिकर्णिका घाट, भारत के प्राचीन और पवित्र शहर वाराणसी में स्थित एक प्रमुख घाट है। यह घाट गंगा नदी के किनारे स्थित है और हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक है। मणिकर्णिका घाट का नाम मां दुर्गा के एक रूप मणिकर्णिका से प्राप्त हुआ है। यह घाट अपनी महत्वपूर्णता, धार्मिकता और ऐतिहासिक महत्व के लिए विख्यात है।
मणिकर्णिका घाट की स्थापना -
मणिकर्णिका घाट की स्थापना सन् 1858 में हुई थी और इसे बाद में विस्तारित और सुंदरता पूर्वक सजाया गया। यह घाट धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का केंद्र है, और विभिन्न पूजाओं, यज्ञों और आरतियों की जगह है। यहां हर रोज हजारों श्रद्धालु भक्तों की भीड़ आती है जो गंगा नदी में सनन करके आशीर्वाद प्राप्त करने और अपने पूजा-पाठ करने के लिए यहां आते हैं।
मणिकर्णिका घाट क्यों प्रसिद्ध है -
मणिकर्णिका घाट पर विशेष रूप से ज्योतिषी, पंडित, पुरोहित और वैदिक पंडित उपस्थित रहते हैं, जो विभिन्न पूजाओं और संस्कारों का आयोजन करते हैं। यहां परंपरागत रूप से अनेक धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन होते हैं और भक्तजन अपनी धार्मिक कर्मकांडों को पूरा करते हैं।
मणिकर्णिका घाट का इतिहास -
इसके अलावा, मणिकर्णिका घाट वाराणसी का इतिहासिक स्थान भी है। कहा जाता है कि मणिकर्णिका घाट पर मां दुर्गा ने अपने शरीर के अवशेषों को धरती पर गिराए थे। इसलिए, यह घाट धार्मिक दृष्टि से प्रमुख माना जाता है और श्रद्धालु लोग यहां आकर अपने पूजा-पाठ करते हैं।
मणिकर्णिका घाट के पास एक मंदिर भी है जो मां दुर्गा को समर्पित है। इस मंदिर में देवी की मूर्ति स्थापित है और यहां भक्तजन देवी की पूजा करते हैं।
इसके अलावा, मणिकर्णिका घाट से यात्री भी गंगा नदी के शुद्ध जल में स्नान करते हैं, जिसे धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है। इसके साथ ही, घाट पर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आरतियाँ भी होती हैं, जिन्हें लोग देखने के लिए आते हैं।
मणिकर्णिका घाट वाराणसी के इतिहास, धार्मिकता और पवित्रता के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां के धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों की गहरी परंपरा है और लोग यहां आकर अपने आत्मिक संवाद को प्राप्त करते हैं। वाराणसी के संस्कृति, इतिहास और धार्मिकता का मणिकर्णिका घाट महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह शहर की पहचान का महत्वपूर्ण संकेत है।
इस प्रकार, मणिकर्णिका घाट वाराणसी के बारे में यह कहना संभव है कि यह एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जो धार्मिकता, पवित्रता और ऐतिहासिक महत्व के साथ यात्रियों को आकर्षित करता है।
वाराणसी के बारे में काम शब्दो में -
इसके अलावा काशी Kashi यानि वाराणसी Varanasi में धार्मिक स्थान बहुत से है। बनारस को तो मंदिरो का सहर भी कहा जाता है , तो यदि आप बनारस मंदिरो का दरसन करने जाना चाहते है तो वाराणसी बहुत ही अच्छा स्थान है , जंहा महादेव जी में विस्वनाथ मंदिर है।






