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शुक्रवार, 30 जून 2023

मणिकर्णिका घाट का इतिहास_ manikarnika ghat varanasi ke bare me _ best sthan varanasi

 मणिकर्णिका घाट वाराणसी के बारे में - 


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किसी ज़माने में लोग बोला करते थे आपकी जिंदगी के आखिरी दिनों में आपको कशी KASHI (VARANASI) चले जाना चाहिए , कहा जाता है काशी में मरने पर आत्मा को सरीर से निकलते समय ज्यादा कास्ट नहीं झेलने पड़ते। दोस्तों बनारस जिसका नाम अभी वाराणसी(VARANASI ) है में स्थित भोलेनाथ की विस्वनाथ VISHWANATH शिवलिंग है जो की गंगा नदी  GANGA RIVER के किनारे बिराजमान है जो की 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है। महादेव के इस चैत्र को ही काशी छेत्र कहा जाता है कशी छेत्र वेदों के अनुसार बहुत ही धार्मिक स्थान है।  वाराणसी में गंगा किनारे बहुत सरे घाट बने हुए है जिनमे एक है ,  मणिकर्णिका घाट, भारत के प्राचीन और पवित्र शहर वाराणसी में स्थित एक प्रमुख घाट है। यह घाट गंगा नदी के किनारे स्थित है और हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक है। मणिकर्णिका घाट का नाम मां दुर्गा के एक रूप मणिकर्णिका से प्राप्त हुआ है। यह घाट अपनी महत्वपूर्णता, धार्मिकता और ऐतिहासिक महत्व के लिए विख्यात है।

मणिकर्णिका घाट की स्थापना -

varanasi ganga


मणिकर्णिका घाट की स्थापना सन् 1858 में हुई थी और इसे बाद में विस्तारित और सुंदरता पूर्वक सजाया गया। यह घाट धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का केंद्र है, और विभिन्न पूजाओं, यज्ञों और आरतियों की जगह है। यहां हर रोज हजारों श्रद्धालु भक्तों की भीड़ आती है जो गंगा नदी में सनन करके आशीर्वाद प्राप्त करने और अपने पूजा-पाठ करने के लिए यहां आते हैं।

मणिकर्णिका घाट क्यों प्रसिद्ध है -

varanasi ghat


मणिकर्णिका घाट को महा समसान घाट भी कहा जाता है क्योंकि क्या मणिकर्णिका घाट पर हमेसा चित्ता जलती रहती है , यंहा पर चीते की अग्नि कभी बुझती नहीं है। यंहा एक चिता की अग्नि सांत नहीं होती तबतक दूसरी चित्ता में आग लगा दी जाती है , इसके कारन मणिकर्णिका घाट ज्यादा जाना जाता है। और वाराणसी में सबसे प्रशिद्ध घाट भी मणिकर्णिका Manikarnika ghat घाट ही है।  

मणिकर्णिका घाट पर विशेष रूप से ज्योतिषी, पंडित, पुरोहित और वैदिक पंडित उपस्थित रहते हैं, जो विभिन्न पूजाओं और संस्कारों का आयोजन करते हैं। यहां परंपरागत रूप से अनेक धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन होते हैं और भक्तजन अपनी धार्मिक कर्मकांडों को पूरा करते हैं।

मणिकर्णिका घाट का इतिहास -

इसके अलावा, मणिकर्णिका घाट वाराणसी का इतिहासिक स्थान भी है। कहा जाता है कि मणिकर्णिका घाट पर मां दुर्गा ने अपने शरीर के अवशेषों को धरती पर गिराए थे। इसलिए, यह घाट धार्मिक दृष्टि से प्रमुख माना जाता है और श्रद्धालु लोग यहां आकर अपने पूजा-पाठ करते हैं।

मणिकर्णिका घाट के पास एक मंदिर भी है जो मां दुर्गा को समर्पित है। इस मंदिर में देवी की मूर्ति स्थापित है और यहां भक्तजन देवी की पूजा करते हैं।

इसके अलावा, मणिकर्णिका घाट से यात्री भी गंगा नदी के शुद्ध जल में स्नान करते हैं, जिसे धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है। इसके साथ ही, घाट पर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आरतियाँ भी होती हैं, जिन्हें लोग देखने के लिए आते हैं।

मणिकर्णिका घाट वाराणसी के इतिहास, धार्मिकता और पवित्रता के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां के धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों की गहरी परंपरा है और लोग यहां आकर अपने आत्मिक संवाद को प्राप्त करते हैं। वाराणसी के संस्कृति, इतिहास और धार्मिकता का मणिकर्णिका घाट महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह शहर की पहचान का महत्वपूर्ण संकेत है।

इस प्रकार, मणिकर्णिका घाट वाराणसी के बारे में यह कहना संभव है कि यह एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जो धार्मिकता, पवित्रता और ऐतिहासिक महत्व के साथ यात्रियों को आकर्षित करता है। 

वाराणसी के बारे में काम शब्दो  में -

इसके अलावा काशी Kashi यानि वाराणसी  Varanasi  में धार्मिक स्थान बहुत से है।  बनारस को तो मंदिरो का सहर भी कहा जाता है , तो यदि आप बनारस मंदिरो का दरसन करने जाना चाहते है तो वाराणसी बहुत ही अच्छा स्थान है , जंहा महादेव जी में विस्वनाथ मंदिर है। 


बुधवार, 28 जून 2023

जम्मू और कश्मीर की खास बाते JAMMU KASHMIR_

जम्मू और कश्मीर की खास बाते -

JAMMU AND KASHMIR


       जम्मू और कश्मीर भारत का एक प्रमुख राज्य है जो उत्तरी भारत में स्थित है। इस राज्य की सीमाएँ पाकिस्तान और चीन से मिलती हैं। यह एक पर्वतीय क्षेत्र है जिसमें शिवालिक पहाड़ियाँ और हिमालयी पर्वतसर्ग हैं। जम्मू और कश्मीर की सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक प्रतीकता इसे विशेष बनाती है।



जम्मू कश्मीर की जलवायु - 

यहां के जलवायु का विविधता काफी आकर्षक है। इस राज्य में शीतल ग्रीष्मकालीन और बरसाती मौसम की पर्याप्तता होती है। पहाड़ों की चोटियों पर हीमपात, बर्फबारी और आकर्षक वादियाँ आपको अपनी जगह से प्रभावित कर देंगी। इसके अलावा इस राज्य में भगवान शिव के धार्मिक स्थलों का भी आकर्षण है, जैसे वैष्णो देवी मंदिर, अमरनाथ यात्रा और श्री आमरनाथ के लिए प्रसिद्ध पहाड़ी गुफा।

जम्मू और कश्मीर की राजधानी और पर्यटक स्थल -

JAMMU AND KASHMIR


जम्मू और कश्मीर की राजधानी श्रीनगर है, जो एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां की खूबसूरत दल झील, मुग़ल बाग़, दल लेक और दल लेक घाटी दर्शनीय स्थलों में से कुछ हैं। इसके अलावा यहां की शिकारा नाव, शालीमार बाग़, निशात बाग़ और चश्मे शाही भी पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हैं।


जम्मू और कश्मीर की परम्पराये -

जम्मू और कश्मीर में आपको रिश्तेदार संस्कृति और अद्वितीय परंपराएँ देखने को मिलेंगी। यहां के लोग अपनी विविधताओं और परंपराओं को मानते हैं और धार्मिक उत्सवों को धूमधाम से मनाते हैं। यहां रहने वाले लोगों की प्रमुख भाषा डोगरी, कश्मीरी और उर्दू है। इसके अलावा जम्मू और कश्मीर की खादी, कश्मीरी शाल, कश्मीरी गुब्बारे, कश्मीरी संगीत और लोक नृत्य इस राज्य की संस्कृति का प्रतिष्ठान हैं।


जम्मू और कश्मीर एक पर्यटन केंद्र भी हैं और यहां देश और विदेश से कई पर्यटक आते हैं। यहां की खूबसूरत घाटी, पहाड़ी तलावों, झीलों और नदियों में गुफाएं, ट्रेकिंग, शिकार, जल यात्रा और प्राकृतिक जंगली जीवन का आनंद लिया जा सकता है। यहां की खास पर्यटन स्थलों में पहलगाम, गुलमर्ग, सोनमर्ग, लेह-लद्दाख़, श्रीनगर, दाल झील और वैश्नो देवी मंदिर शामिल हैं।

जम्मू कश्मीर की अर्थब्यवस्था -

जम्मू और कश्मीर (JAMMU AND KASHMIR ) भारत का केंद्र शासित प्रदेश है, यंहा पर अनुछेद 370 हटाने के बाद पुनर्गठन 2019  के तहत जम्मू और कश्मीर दो केंद्रशासित प्रदेश में बात गए।  जम्मू और कश्मीर की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, पशुपालन, मांस और डेयरी उत्पादन, औद्योगिक उत्पादन, धातुओं का खनन, पर्यटन और शिकार से जुड़ी हुई है। यहां पर अपनी मिट्टी और जलवायु की वजह से फल, सब्जियाँ, अनाज, मेवे, चाय, सफेद मूंग और फूल उत्पादन होता है। इसके अलावा यहां पर शीर्ष ग्रामीण उत्पादन में शामिल हैं जैसे रूमाल, कश्मीरी कारपेट, शालीमार का कपड़ा और वुलांट्री गुलाब का इत्र।


जम्मू और कश्मीर अपनी विविधता, आकर्षकता और ऐतिहासिक महत्व के कारण एक मशहूर पर्यटन स्थल हैं। इस खूबसूरत राज्य की संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक स्मारकों का आनंद लेने के लिए देश और विदेश से कई पर्यटक आते हैं। यहां के पहाड़ी तालाबों, शानदार वादियों, इतिहासिक मंदिरों, गुफाओं, झीलों और प्राकृतिक जीवन में छिपे समृद्धता का आनंद लेने का मौका मिलता है।

इस प्रकार, जम्मू और कश्मीर एक रोमांचक और पर्यटन के लिए परिपूर्ण स्थान है जहां आप अपने मन को शांति और प्रकृति के साथ जोड़कर खुद को रिज़ॉर्ट कर सकते हैं। यहां की रमणीय दृश्य, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व आपको यहां की यात्रा को अविस्मरणीय बना देंगे। इसलिए, जब आप भारत में यात्रा करें, तो जम्मू और कश्मीर अपनी सूची में जरूर शामिल करें।
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मंगलवार, 20 जून 2023

महाकालेश्वर दरसन _UJJAIN_MAHAKAL TEMPLE

 महाकालेश्वर मंदिर - 

MAHAKALESHWAR
MAHAKALESHWAR


  जय श्री महाकाल दोस्तों , महाकलेवर मंदिर के बारे में कौन नहीं जनता ये एक हिन्दू मंदिर है जो भगवान शिव के महाकाल रूप को समर्पित है।  ये मंदिर भारत देश के मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन में इस्थित है।  इस मंदिर के  पास में  शिप्रा नदी बहती  है।  जो भी श्रद्धालु महाकाल मंदिर को दरसन करने जाता है ओ शिप्रा नदी में स्नान करता है। स्नान करने के बाद महाकालेश्वर भगवान का दरसन करने के लिए जाते है। महाकालेश्वर मंदिर में भगतो की बहुत भीड़ इकठा होती है। वंहा पर हिंदुस्तान में कोने कोने से लोग आते हैं। यंहा पर आने से लोगो की मनोकामना पूरा होता है। 

  महाकाल मंदिर में प्रवेश करने के कई रस्ते है पर श्रद्धालुओ की सुरक्छा के लिए भक्तो को एक लाइन में होकर मंदिर में प्रवेश कराया जाता है।  यंहा पर हमेसा ही भीड़ होती है इस लिए मंदिर में एक कतार का नियम है।  मंदिर के बहार प्रसाद मिल जाते है। हम जंहा प्रसाद लेते है वंही पर अपना सामान और जूते चपल भी रख सकते हैं और उसके बाद हमें मंदिर में प्रवेश करना पड़ेगा। 

  बहार से आये श्रद्धालुओं को रहने और खाने की बहुत सारी सुबिधाये है। महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन सहर के बिच में स्थित होने के कारन यंहा बहुत सारी  होटल और खाने पिने की दुकाने मिल जाती है महाकालेश्वर मंदिर से उज्जैन रेलवेस्टेशन 2 किलोमीटर की दुरी पर है।  इस्टेशन से मंदिर जाने के लिए ऑटोरिक्सा या 'इ रिक्सा' जैसे बहुत से साधन मिल जाते है। दोस्तों यंहा पर VIP दरसन के लिए 1500 रूपए फिश लगता है।  


महाकाल मंदिर के दिव्या दरसन -

MAHAKALWSHWAR TEMPLE
MAHAKALESHWAR TEMPAL


  महाकालेश्वर भगवान की मूर्ति दक्छिन दिशा में होने के कारन दक्छिणमूर्ति कहा जाता है।  महाकालेश्वर मंदिर 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है।  इस मंदिर के गर्वगृह के ऊपर भगवान ओम्कालेस्वर की तस्वीर है और मंदिर के गर्वगृह के पश्चिम में गणेश जी , उत्तर में पारबती जी और पूर्व में कार्तिके जी बिराजमान है।  मंदिर के दक्छिन में नंदी महाराज जी की मूर्ति है और मंदिर की तीसरी मंजिल पर नागचन्द्रेश्वर की मूर्ति है जो नागपंचमी के दिन दरसन होता है। महाशिवरात्रि के दिन यंहा पर बिसाल मेला लगता है और पूरी रत पूजा होती है। 

उज्जैन में रात में कोई राजा क्यों नहीं रुकते है  (UJJAIN ME RAT KO KOI RAJA KYON NAHI RUKATE HAI -

 दोस्तों आपको बतादे की उज्जैन सहर में कोई भी राजा पूरी रात्रि को रुकता नहीं है , पुराणों के अनुसार मने तो उज्जैन का राजा सिर्फ महाकाल बाबा हैं। यदि कोई भी राजा या मंत्री यंहा रात्रि को रुकता है तो उसकी सजा उसे भुगतनी पड़ती है। 

  दोस्तों महाकालेश्वर मंदिर में आने और महाकाल के दरसन के बाद अपने मन को बहुत सन्ति और सुख मिलती है।ऐसा लगता है जैसे सक्छात  भगवान शिव का दरसन हो रहा है। आप इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद कमेंट में जय श्री महाकाल लिखे और यदि इस आर्टिकल से कुछ भी हेल्प या जानकारी मिली हो तो भी आप जय श्री महाकाल लिखे ,...    जय श्री महाकाल ( JAY SHREE MAHAKAL) 

सोमवार, 19 जून 2023

महाकालेश्वर मंदिर ( mahakaleswar temple)

महाकालेश्वर मंदिर -

महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन शहर में स्थित है। यह भारत के सबसे बड़े हिंदू मंदिरों में से एक है। मंदिर का निर्माण राजा सोमेश्वर ने 11वीं शताब्दी में करवाया था और यह भगवान शिव को समर्पित है।


मंदिर एक पहाड़ी की चोटी पर बना है और इसके तीन प्रवेश द्वार हैं, जिनमें ऊपर जाने के लिए सीढ़ियाँ हैं। मुख्य प्रवेश द्वार एक विशाल हॉल में जाता है, जिसके केंद्र में भगवान शिव की एक बड़ी छवि है। इसके चारों ओर भगवान विष्णु, गणेश और अन्य देवताओं के विभिन्न रूपों की चार छोटी छवियां भी हैं।


इनके अलावा मंदिर में तीन अन्य प्रवेश द्वार भी हैं। उनमें से एक हॉल में जाता है जहां गणेश, लक्ष्मी और सरस्वती जैसे विभिन्न देवताओं की चार और छवियां हैं। दूसरा एक दूसरे हॉल में जाता है जिसमें दुर्गा और कार्तिकेय जैसे चार और देवता हैं।


मुख्य हॉल के बाहर एक छोटा सा प्रांगण भी है जिसे 'जगमोहन' के नाम से जाना जाता है। यहां आप खंभों पर सुंदर मूर्तियां देख सकते हैं, जो हिंदू पौराणिक कथाओं के विभिन्न दृश्यों को दर्शाती हैं, जैसे भगवान राम द्वारा सीता को रावण के महल से छुड़ाना, भगवान कृष्ण अपनी गोपियों के साथ नृत्य करते हुए अपनी बांसुरी बजाते हुए या यहां तक कि भगवान बुद्ध अपने शिष्यों को सिखाते हुए कि जीवन का अर्थ क्या है