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शुक्रवार, 12 जून 2020

इम्यून सिस्टम बढ़ाने के तरीके

 इम्यूनिटी बढ़ाने के तरीके-


    नमस्कार दोस्तों बैक्टीरिया और वायरस जैसे रोगों से लड़ने के लिए हमारे शरीर में इम्यून सिस्टम का होना बहुत जरूरी है क्योंकि यह उन लोगों से लड़ता है। जैसे ही बैक्टीरिया और वायरस हमारे शरीर में प्रवेश करता है तो अगर हमारा ईमेल सिस्टम मजबूत हो तो उन पर हावी हो जाता है और उनसे लड़कर खत्म कर देता है जिसे हमारा शरीर निरोग हो जाता है।
इसलिए हमारे शरीर में ईमेल सिस्टम का होना बहुत ही जरूरी है तो चलिए मैं इस पोस्ट में आपको इम्यून सिस्टम बढ़ाने की कुछ तरीके बताऊंगा

1- हेल्दी खाना खाए-
आजकल लोगों में अधिकांश बीमारी हेल्दी खाना ना खाने के कारण होता है क्योंकि आजकल बच्चे हो या व्यस्त सभी के खाने में पके हुए अनाज से  लेकर जंक फूड जैसे  भोजन रहते हैं। इन आदतों से जस्ता आयरन कैल्शियम और अन्य विटामिन की कमी शरीर में हो जाती है। अधिक पौष्टिक आहार वाले पूज्य पदार्थ सुनिश्चित करेगा कि आपके शरीर  वह सब कुछ मिल जाए जो आपके शरीर को जरूरत है।

2- सक्रिय रहे-
   दोस्तों इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज है कि सक्रिय रहना। हमारा आलस्य पन हमारे शरीर को रोगों से ग्रसित कर देता है इसलिए हमें रोजाना अपने शरीर से कुछ एक्टिविटी करते रहना चाहिए जैसे सुबह एक्सरसाइज या अपने  सरीरिक कुछ काम करना चाहिए। शोध बताते हैं कि सरीरिक एक्टिविटी प्रतीक्षा प्रणाली की कोशिकाओं और एंटीबॉडी के उत्पादन को बढ़ावा देती है।

3- अच्छी नींद लेना-
    विभिन्न चिकित्सा पौधों से पता चलता है कि अच्छी नींद भी हमारी इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार होता है इसलिए हमें 7 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए जिससे हमारे शरीर के तनाव खत्म होते हैं और हमारा शरीर अच्छे से आराम करता है जिसके वजह से हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है।
4- स्वच्छता बनाए रखना-
     हमें अपने शरीर को स्वच्छ रखना चाहिए हाथों को बार-बार धोना चाहिए अगर अपने हाथ से कोई चीज छूने के बाद हमें हाथों को बिना धोए आंख मुंह नाक के तरफ नहीं करना चाहिए।
5- योग से बढ़ाएं इम्यूनिटी-
   हमारे जीवन शैली में योग भी इम्यूनिटी बढ़ाने मैं बहुत थी कारगर होता है। हमें दिल्ली सुबह अच्छा समय पर योग करना चाहिए । इसमें कपालभाति अनुलोम विलोम व्यायाम कारगर साबित होता है।

रविवार, 7 जून 2020

उत्तराखंड के बारे में

 उत्तराखंड- 

उत्तराखंड भारत के उत्तर में स्थित है। उत्तराखंड का निर्माण 9 नवंबर 2000 में कई वर्षों के लंबे संघर्षो के बाद किया गया था। जो यह भारत का 27 राज्य बना। 2000 से 2006 तक उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था। जनवरीीी 2007 में इसका नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया ।




  राज्य की सीमाएं उत्तर में तिब्बत  पूर्व में नेपाल पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश है। अलग राज्य बनने से पहले या उत्तर प्रदेश में आता था। यहां भारत की सबसे बड़ी नदी गंगा और यमुना का उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमनोत्री  तथा इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के महत्वपूर्ण स्थल है।



  देहरादून उत्तराखंड की राजधानी होने के साथ-साथ सबसे बड़ा शहर भी है। राज्य का उच्च न्यायालय नैनीताल में है। किस राज्य में पहाड़ी एरिया अधिक है। अगर आपको पहाड़ घूमना हो तो उत्तराखंड सबसे अच्छा ऑप्शन है।


  यहां के कुमाऊं क्षेत्र पौराणिक ग्रंथों में मानस खंड के नाम से प्रसिद्ध है। इस कुमाऊं में गोरखा का राज चलता था जो की 1815 में अंग्रेजों से हारकर नेपाल चलेगा।

 उत्तराखंड की प्रमुख नदियां-  


      उत्तराखंड की संस्कृति में नदियों का बहुत ही महत्व है यहां की नदियां सिंचाई और विद्युत उत्पादन में प्रसिद्ध हैं। इन के किनारे अनेक धार्मिक व सांस्कृतिक स्थल है हिंदू की पवित्र नदी गंगा का उद्गम स्थान हिमालय के दक्षिणी श्रेणी में है। गंगा का प्रारंभ अलकनंदा और भागीरथी से होता है।गंगा नदी भागीरथी के रूप में गोमुख से 25 किलोमीटर में निकलती है। जिससे अलकनंदा भागीरथी देवप्रयाग में मिलती है जिसके बाद  गंगा  का  उद्गम  होता  है।




   2011 के अनुसार उत्तराखंड की जनसंख्या 1,01,16,752 है। यहां मैदानी क्षेत्रों के जिले पर्वतीय क्षेत्रों के जिले से अधिक जनसंख्या वाला है।  उत्तराखंड के मून निवासियों को कुमाऊनी व  गढ़वाली कहां जाता है।




  यहां घूमने के लिए मुख्य स्थान है केदारनाथ गंगोत्री नैनीताल यमुनोत्री बद्री नाथ ऋषिकेश फूलों की घाटी आदि है 
    अगर आपको  मेरे पोस्ट में कोई भी चीजें गलत लगी हो तो अपना राय कमेंट बॉक्स में दीजिए धन्यवाद।

   

शुक्रवार, 5 जून 2020

उज्जैन शहर ujjain (mahankal )

 उज्जैन एक ऐसा सहर है जिसका राजा भोलेनाथ जी है जिनको यंहा के महाकाल के नाम से जाना जाता है। उज्जैन एक बहुत पुराणी प्राचीन सहर है जिसका पुराना नाम अवंतिका था।  अवंतिका यानि उज्जैन प्राचीन समय में सम्राट विक्रमादित्य के राज्य की राजधानी थी। सम्राट विक्रमादित्य गर्दभिल के सम्राट थे। उज्जैन मध्य प्रदेश के एक प्रमुख शहर है। जो शिप्रा नदी के किनारे बसा है। या एक अत्यंत प्राचीन शहर है। इसे कालिदास के नगरी के नाम से  जाना जाता है ।
     
      उज्जैन सहर में बहुत से धार्मिक स्थल है।  उज्जैन को मंदिरो की नगरी भी कहा जाता है यह्ना के मंदिर  जैसे महाकालेश्वर मंदिर , कालभैरव मंदिर और माता जी का मंदिर अदि है।  जो गुमने लायक और देखने लायक भी है। उज्जैन में 12 वर्ष पर एक बार सिंहस्त  महाकुम्भ का मेला भी लगता है जिसका  बहुत बड़ा महातम होता है  यंहा पर दूर दूर से लोग साधु संत स्नान करने एते हैं। यंहा का महाकाल मंदिर अपने आप में बहुत ही बड़ा चमत्कारी मंदिर है।  यंका भगवान शिव का आपरूपी  ज्योतिर्लिंग है।  यंहा लोग एते है और शिप्रा नदी में स्नान कर के महाकालेश्वर मंदिर में जाकर महाकाल का दरसन करते है।   

       उज्जैन  का क्षेत्रफल कुल 157 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ  है। और उज्जैन की  जनसंख्या 5 15 215 है। इसका   घनत्व 3300 वर्ग किलोमीटर में है   और दोस्तों उज्जैन के  गाड़ी  का पंजीकरण संख्या  Mp13 है ।
 12 ज्योतिर्लिंगों में एक महाकाल यहां पर स्थित है। उज्जैन मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर से 45 किलोमीटर की दूरी पर पूर्व में  है। उज्जैन में आने या उज्जैन से जाने के लिए रेलवे की सुबिधा और वायुयान की सुबिधा उपलब्ध है।  उज्जैन रेलवे स्टेशन से हर राज्य के लिए ट्रेने जाती ही। 

      उज्जैन में धार्मिक स्थल - महाकालेश्वर मंदिर , हरसिद्धि माता मंदिर, श्री गणेश मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, शिप्रा घाट, गोपाल मंदिर, गढ़कालिका मंदिर, भर्तहरि गुभा अदि है।  दोस्तों मई उम्मीद करता हूँ की ये पोस्ट आपलोगों को अच्छा लगा होगा धन्यवाद्। 






मंगलवार, 2 जून 2020

इंदौर सहर और उनके प्रसिद्ध स्थान

 इंदौर सिटी -

इंदौर सहर और उनके प्रसिद्ध स्थान


      इंदौर  भारत के मध्य प्रदेश  राज्य का एक नगर है। यह एक  मध्य प्रदेश में सबसे अच्छा सहर है। इंदौर  जनसंख्या की दृष्टि से यह बड़ा शहर है। 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की जनसंख्या 21,67,447 है।  यह मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी घनी आबादी वाला शहर है। यह मध्य प्रदेश की वाणिज्यिक राजधानी है।इंदौर में घूमने का स्थान भी है यंहा कई महल है और बिस्वबिद्यालय है। इंदौर सहर की नीव 17वीं सताब्दी में हुई थी।  इसके साथ यह शहर ना केवल मध्यप्रदेश बल्कि देश के अन्य क्षेत्र शिक्षा के लिए प्रसिद्ध है। इंदौर को उज्जैन से ओमकालेश्वर की ओर जाने वाली नर्मदा नदी घाटी मार्ग पर एक व्यापार बाजार के रूप में स्थापित किया गया था। 

   इंदौर सहर का नाम इंद्र भगवान के नाम पर इंद्रपुरी रखा गया था बाद में इसे इंदौर कर दिया गया। इंदौर सहर में बहुत पुराने इमारते भी है जो देखने लायक है यदि आप यंहा घूमने जा रहे है तो इंदौर घूमने के लिए बहुत बढ़िया जगह है यंहा पर देवी अहिल्या माता होल्कर का महल है ,और प्रमुख लोगों के मकबरे भी है और यंहा सबसे बढ़िया घूमने के लिए कांच की मंदिर है ये मंडी जैन मंदिर है इसके अलावा यंहा राजवाड़ा , लालबाग, बिजासन मंदिर, अनपूर्णा माता मंदिर ,अहिल्याश्रम ,मैडीकबाग, गणेश मंदिर खजराना में ,इमामबाड़ा अदि है। 

  यंहा पर कुछ दरसनिक स्थान भी है - हरसिद्धि माता मंदिर , बिजासन मंदिर , गणेश मंदिर ( खजराना) ,अनपूर्णा माता मंदिर, देवगुराड़िया, गेंदेस्वर महेस्वर मंदिर (परदेशीपुरा ), शनि मंदिर , गोपाल मंदिर (राजवाड़ा),गोपेश्वर महेस्वर 

 अंग्रेजों के जमाने से ही इंदौर को एक औद्योगिक क्षेत्र मैं विकसित किया गया था यहां लगभग 5000 छोटे-बड़े उद्योग है पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में 400 से अधिक उद्योग है। औधोगिक होने के साथ-साथ इंदौर एक शिक्षा के क्षेत्र में भी उभरा है। इंदौर में आने के लिए अच्छी यता यात की साधन उपलब्ध है।  इंदौर में हवाई अड्डा है जो भारत के प्रमुख हवाई अडो में से एक है।  इंदौर से रेलवे मार्ग से यात्रा की जा सकती है जो की कई राज्यों में ट्रेन जाती है और अति है।