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गुरुवार, 30 मार्च 2023

दिल्ली का लाल किला और उसके बारे में (Delhi Red Fort Travel)

 दिल्ली का लाल किला और उसके बारे में :

 दिल्ली का लाल किला और उसके बारे में (Delhi Red Fort Travel)  

        दिल्ली का लाल किला वास्तुकला का एक अभूतपूर्व नमूना है और भारतीय इतिहास की कुछ सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का भी गवाह है। इस ईमारत को हाम किला--मुबारक जैसे कई नामों से भी जानते हैं 


लाल किले का इतिहास :

       लाल किला 1648 में जब राजधानी आगरा से दिल्ली स्थानांतरित हुई थी तब , मुगल सम्राट शाहजहाँ ने बनवाया गया था।  दिल्ली के लाल किला का स्थापत्य दरअसल आगरा के लाल किले से प्रेरित है जिसे शाहजहाँ के दादा अकबर ने बनवाया था।

         लाल किला के अंदर पुराना किला सलीमगढ़ भी शामिल है, इसे 'इस्लाम शाह सूरी' ने 1546 ईसवी  में बनवाया था। इस विशाल दीवार वाली संरचना को पूरा होने में लगभग एक दशक (10 साल) का समय लगा था। शाहजहाँ के दरबार के उस्ताद हामिद और उस्ताद अहमद ने 1638 में निर्माण शुरू किया था। 

 

लाल किला वास्तुकला (आर्किटेक्चर) :

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       दिल्ली का लाल किला मुगल वास्तुकला की प्रतिभा को दर्शाता है, जो विभिन्न स्थानीय निर्माण की परंपराओं जैसे फारसी और हिंदू वास्तुकला के साथ मिश्रित है। लाल किला ने इसके बाद बने दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के प्रमुख स्मारकों की वास्तुकला को प्रभावित किया है।

 

     यदि आप लाल किला घूमने जाते हो तो लाल किले में जाने के लिए दो द्वार है जिसका नाम है लाहोरी गेट और दिल्ली गेट। जो लाहौरी गेट है औ  किले का मुख्य प्रवेश द्वार है।

 

लाल किला के अंदर क्या है?

             मोती मस्जिद

             हयात बख्श बाग

             छत्ता चौक

             मुमताज महल

             रंग महल

             खास महल

             दीवान--आम

             दीवान--खास

             हीरा महल

             प्रिंसेस क्वार्टर

             टी हाउस

             नौबत खाना

             नहर--बिहिश्तो

             हमाम

             बाओली

 

 

दिल्ली के लालकिला के बारे में मुख्य तथ्य :

स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराना : 

     भारत के प्रधानमंत्री हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर राष्ट्रीय झंडा फहराते हैं। 15 अगस्त 1947 को भारत को अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद से लाल किले पर झंडा फहराया जाता है। 

असली नाम

       इमारत का असली नाम किला--मुबारक था। अंग्रेजों ने इसकी विशाल लाल बलुआ पत्थर की दीवारों के कारण इसका नाम रेड फोर्ट रख दिया, जबकि स्थानीय लोगों ने उसका अनुवाद लाल किला किया।

असली रंग

    चूंकि दिल्ली में लाल बलुआ पत्थर की पर्याप्त आपूर्ति नहीं थी, इसलिए लाल किला मूल रूप से चूना पत्थर से बना था।

अंतिम मुगल का मुकदमा स्थल

       अंग्रेजों ने अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर पर राजद्रोह के आरोप में लाल किला में मुकदमा चलाया, जिसके बाद उन्हें रंगून (अब म्यांमार) भेज दिया गया।

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